24 May 2022

मध्यकालीन भारत

                  अशोक बिहार राष्ट्रीय पुस्तकालय 

                                                                  (www.ashokaeducation.com)

                              भारतीय इतिहास 
                             मध्यकालीन भारत 

प्राचीन भारत

                   अशोक बिहार राष्ट्रीय पुस्तकालय 

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                              भारतीय इतिहास 
                                 प्राचीन भारत 

मुग़ल सम्राज्य (1719 से 1857)

रफ़ी उद-दाराजात अथवा रफ़ीउद्दाराजात अथवा रफ़ी उद-दर्जत का जन्म- 1 दिसम्बर, 1699 को हुआ था और वह दसवाँ मुग़ल बादशाह था. वह रफ़ी उस-शहान का पुत्र तथा अज़ीमुश्शान का भाई था. फ़र्रुख़सियर के बाद 28 फ़रवरी, 1719 को सैयद बंधुओं के द्वारा उसे बादशाह घोषित किया गया था. बादशाह रफ़ी उद-दाराजात बहुत ही अल्प समय (28 फ़रवरी से 4 जून, 1719 ई.) तक ही शासन कर सका. सैय्यद बन्धुओं ने फ़र्रुख़सियर के विरुद्ध षड़यन्त्र रचकर 28 अप्रैल, 1719

19 May 2022

मुग़ल बादशाह फर्रुखशियर

फ़र्रुख़सियर एक मुग़ल बादशाह था जिसने 1713 से 1719 तक हिन्दुस्तान पर हुकूमत की. 
उसका पूरा नाम अब्बुल मुज़फ़्फ़रुद्दीन मुहम्मद शाह फ़र्रुख़ सियर था.  1715 ई. में अंग्रेजो का एक शिष्टमंडल जाॅन सुरमन की नेतृत्व में भारत आया. यह शिष्टमंडल उत्तरवर्ती मुग़ल शासक फ़र्रूख़ सियर की दरबार में 1717 ई. में पहुँचा. उस समय फ़र्रूख़ सियर जानलेवा घाव से पीड़ित था. इस शिष्टमंडल में हैमिल्टन नामक डाॅक्टर थे जिन्होनें फर्रखशियर का इलाज किया था. इससे फ़र्रूख़ सियर खुश हुआ तथा अंग्रेजों को भारत में कहीं भी व्यापार करने की अनुमति तथा अंग्रेज़ों द्वारा बनाऐ गए सिक्के को भारत में सभी जगह मान्यता प्रदान कर दिया गया. फ़र्रूख़ सियर द्वारा जारी किये गए इस घोषणा को ईस्ट इंडिया कंपनी का मैग्ना कार्टा कहा जाता है. मैग्ना कार्टा सर्वप्रथम 1215 ई. में ब्रिटेन में जाॅन-II के द्वारा जारी हुआ था. 

12 May 2022

मुग़ल बादशाह जहाँदारशाह

जहाँदारशाह बहादुरशाह प्रथम के चार पुत्रों में से एक था. बहादुरशाह प्रथम के मरने के बाद उसके चारों पुत्रों 'जहाँदारशाह', 'अजीमुश्शान', 'रफ़ीउश्शान' एवं 'जहानशाह' में उत्तराधिकार के लिए संघर्ष छिड़ गया. इस संघर्ष में ज़ुल्फ़िक़ार ख़ाँ के सहयोग से जहाँदारशाह के अतिरिक्त बहादुरशाह प्रथम के अन्य तीन पुत्र आपस में संघर्ष के दौरान मारे गये. 51 वर्ष की आयु में जहाँदारशाह 29 मार्च, 1712 को मुग़ल राजसिंहासन पर बैठा. ज़ुल्फ़िक़ार ख़ाँ इसका प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया, तथा असद ख़ाँ 'वकील-ए-मुतलक़' के पद पर बना रहा. ये दोनों बाप-बेटे ईरानी अमीरों के नेता थे. 

मुग़ल बादशाह बहादुरशाह प्रथम

बहादुर शाह प्रथम का जन्म 14 अक्तूबर, सन् 1643 ई. में बुरहानपुर, भारत में हुआ था. बहादुर शाह प्रथम दिल्ली का सातवाँ मुग़ल बादशाह (1707-1712 ई.) था. 'शहज़ादा मुअज्ज़म' कहलाने वाले बहादुरशाह, बादशाह औरंगज़ेब का दूसरा पुत्र था. अपने पिता के भाई और प्रतिद्वंद्वी शाहशुजा के साथ बड़े भाई के मिल जाने के बाद शहज़ादा मुअज्ज़म ही औरंगज़ेब के संभावी उत्तराधिकारी बना. बहादुर शाह प्रथम को 'शाहआलम प्रथम' या 'आलमशाह प्रथम' के नाम से भी जाना जाता है.

10 May 2022

भारत के महान वीर हिन्दू हृदय साम्राट शिवाजी महाराज जिन्होंने मुगलो को उसकी औकात दिखा दिया

भारत के वीर सपूतों में से एक श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में सभी लोग जानते हैं. बहुत से लोग इन्हें हिन्दू हृदय सम्राट कहते हैं तो कुछ लोग इन्हें मराठा गौरव कहते हैं, जबकि वे भारतीय गणराज्य के महानायक थे. छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म सन्‌ 19 फरवरी 1630 में मराठा परिवार में हुआ. उनका पूरा नाम शिवाजी भोंसले था. शिवाजी शाहजी और माता जीजाबाई के पुत्र थे. उनका जन्म स्थान पुणे के पास स्थित शिवनेरी का दुर्ग है. बचपन में शिवाजी अपनी आयु के बालक इकट्ठे कर उनके नेता बनकर युद्ध करने और किले जीतने का खेल खेला करते थे. युवावस्था

09 May 2022

मुगल बादशाह औरंगजेब

औरंगजेब भारत देश के एक महान मुग़ल शासक थे, जिन्होंने भारत में कई वर्षो तक राज्य किया. वे छठे नंबर के मुग़ल शासक थे, जिन्होंने भारत में शासन किया. औरंगजेब ने 1658 से 1707 लगभग 49 साल तक शासन किया, अकबर के बाद यही मुग़ल थे, जो इतने लम्बे समय तक राजा की गद्दी पर विराजमान रहे. इनकी मौत के बाद मुग़ल एम्पायर पूरी तरह हिल गया था, और धीरे धीरे ख़त्म होने लगा था. औरंगजेब ने अपने पूर्वज के काम को बखूबी से आगे बढाया था, अकबर ने जिस तरह मेहनत व लगन से मुग़ल सामराज्य को खड़ा किया था, औरंगजेब

मुग़ल बादशाह शाहजहाँ

शाहजहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था. 
सम्राट जहाँगीर के मौत के बाद, छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था. 1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठा. शाहजहाँ का जन्म जोधपुर के शासक राजा उदयसिंह की पुत्री 'जगत गोसाई' के गर्भ से 5 जनवरी, 1592 ई. को लाहौर में हुआ था. उसका बचपन का नाम ख़ुर्रम था. ख़ुर्रम जहाँगीर का छोटा पुत्र था, जो छल−बल से अपने पिता का उत्तराधिकारी हुआ था. वह बड़ा कुशाग्र बुद्धि, साहसी और शौक़ीन बादशाह था. वह बड़ा कला प्रेमी, विशेषकर स्थापत्य कला का प्रेमी था. उसका विवाह 20 वर्ष की

मुग़ल बादशाह जहाँगीर

जहाँगीर एक मुगल सम्राट था जो अपने पिता अकबर के बाद सिंहासन पर बैठा था. मुगल सम्राट जहांगीर को आगरा में बनी “न्याय की जंजीर” के लिए भी याद किया जाता है. जहाँगीर का जन्म 31 अगस्त 1569 को फतेहपुर सीकरी में हुआ था. उनका वास्तविक नाम मिर्ज़ा नूर-उद्दीन बेग़ मोहम्मद ख़ान सलीम जहाँगीर था. उनके पिता का नाम अकबर तथा उनकी माता का नाम मरियम उज़-ज़मानी था. जहाँगीर से पहले अकबर की कोई भी संतानें जीवित नहीं बचती थी, जिसके चलते सम्राट अकबर ने काफी मिन्नतें कीं और फिर बाद सलीम का जन्म हुआ था. जहांगीर को

अकबर और महाराणा प्रताप के बीच हल्दी घाटी का युद्ध

महाराणा प्रताप का नाम भारत के इतिहास में उनकी बहादुरी के कारण अमर है. वह अकेले राजपूत राजा थे जिन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की. उनका जन्म आज ही के दिन यानी 9 मई, 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ किले में हुआ था. उनके पिता का नाम महाराणा उदय सिंह था और माता महारानी जयवंता बाई थीं. अपने परिवार की वह सबसे बड़ी संतान थे. उनके बचपन का नाम कीका था. बचपन से ही महाराणा प्रताप बहादुर और दृढ़ निश्चयी थे. सामान्य शिक्षा से खेलकूद एवं हथियार बनाने की कला सीखने में उनकी रुचि अधिक थी. उनको धन-दौलत की नहीं बल्कि मान-सम्मान की ज्यादा परवाह थी. उनके बारे में मुगल दरबार के कवि अब्दुर रहमान ने लिखा है, 'इस दुनिया में सभी चीज खत्म होने वाली है. धन-दौलत खत्म हो जाएंगे लेकिन महान इंसान के गुण हमेशा जिंदा रहेंगे. प्रताप ने धन-दौलत को छोड़ दिया लेकिन अपना सिर कभी नहीं झुकाया. हिंद के सभी राजकुमारों में अकेले उन्होंने अपना सम्मान कायम रखा.

06 May 2022

मुग़ल सम्राट अकबर

जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर मुगल वंश का तीसरा शासक था जिन्होंने 1556 से 1605 तक भारत पर शासन किया. अकबर को अकबर-ऐ-आज़म (अर्थात अकबर महान), शहंशाह अकबर, महाबली शहंशाह के नाम से भी जाना जाता है. सम्राट अकबर मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का पौत्र और नासिरुद्दीन हुमायूं एवं हमीदा बानो का पुत्र था. बाबर का वंश तैमूर और मंगोल नेता चंगेज खां से संबंधित था अर्थात उसके वंशज तैमूर लंग के खानदान से थे और मातृपक्ष का संबंध चंगेज खां से था. अकबर मात्र तेरह वर्ष की आयु में अपने पिता नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायुं

शुरी सम्राज्य के संस्थापक शेर शाह सूरी

शेरशाह सूरी भारत में जन्मे पठान थे जिन्होंने हुमायूँ को 1540 में हराकर उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य स्थापित किया था. शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिये एक सैनिक के रूप में काम किया था जिन्होंने उन्हें पदोन्नत कर सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया. 1537 में, जब हुमायूँ कहीं सुदूर अभियान पर थे तब शेरशाह ने बंगाल पर कब्ज़ा कर सूरी वंश स्थापित किया था. सन् 1539 में, शेरशाह को चौसा की लड़ाई में हुमायूँ का सामना करना पड़ा जिसे शेरशाह ने जीत लिया. 1540 ई. में शेरशाह ने हुमायूँ को पुनः हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शेर खान की उपाधि लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत पर अपना साम्रज्य स्थापित कर दिया.

06 April 2022

मुगल बादशाह हुमायूँ

प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर के पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ एक मुग़ल शासक था. बाबर की मृत्यु के पश्चात हुमायूँ ने 1530 में भारत की राजगद्दी संभाली और अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान एंव उत्तर भारत के हिस्सों पर 1530-1540 और फिर 1555-1556 तक शासन किया. 
26 दिसम्बर, 1530 ई. को बाबर की मृत्यु के बाद 30 दिसम्बर, 1530 ई. को 23 वर्ष की आयु में हुमायूँ का राज्याभिषेक किया गया. आपको बता दें कि बाबर ने उनके चार पुत्रों में मुगल सम्राज्य को लेकर लड़ाई न हो और अपने अन्य पुत्रों की उत्तराधिकारी बनने की इच्छा जताने से पहले ही अपने जीवित रहते हुए हुंमायूं को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. इसके साथ ही बाबर ने चारों तरफ फैले अपने मुगल सम्राज्य को मजबूत बनाए रखने के लिए हुंमायूं को मुगल सम्राज्य को चारों भाईयों में बांटने

मुगल बादशाह बाबर

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद उर्फ बाबर मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक और प्रथम शासक था. इसका जन्म मध्य एशिया के वर्तमान उज़्बेकिस्तान में हुआ था. यह तैमूर और चंगेज़ ख़ान का वंशज था. मुबईयान नामक पद्य शैली का जन्मदाता बाबर को ही माना जाता है. 1504 ई. में इन्होने काबुल तथा 1507 ई में कन्धार को जीता तथा बादशाह की उपाधि धारण की. 1519 से 1526 ई तक भारत पर इसने 5 बार आक्रमण किया. 1526 में इन्होंने पानीपत के मैदान में दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी. बाबर ने 1527 में ख़ानवा, 1528 में चंदेरी तथा 1529 में घग्गर जीतकर अपने राज्य को सुरक्षित किया. 1530 ई० में इसकी मृत्यु हो गयी.

भारत पर मुग़ल सम्राज्य का शासन

मुग़ल साम्राज्य एक इस्लामी तुर्की-मंगोल साम्राज्य था जिसकी स्थापना बाबर के द्वारा 1526 ईस्वी में की गई थी. 1526 में स्थापित यह सम्राज्य 1857 तक बचा रहा, जब वह ब्रिटिश राज द्वारा हटाया गया. यह राजवंश कभी कभी तिमुरिड राजवंश के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि बाबर तैमूर का वंशज था. 
फ़रग़ना वादी से आए एक तुर्की मुस्लिम बाबर ने मुग़ल राजवंश को स्थापित किया था. उन्होंने उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों पर हमला किया और दिल्ली के शासक इब्राहिम शाह लोधी को 1526

05 April 2022

भारत के महान हिन्दू ह्रदय सम्राट राणा सांगा

राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) उदयपुर में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे तथा राणा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे. महाराणा संग्राम सिंह, महाराणा कुंभा के बाद,सबसे प्रसिद्ध महाराजा थे. मेवाड़ में सबसे महत्वपूर्ण शासक. इन्होंने अपनी शक्ति के बल पर मेवाड़ साम्राज्य का विस्तार किया और उसके तहत राजपूताना के सभी राजाओं को संगठित किया. रायमल की मृत्यु के बाद, 1509 में, राणा सांगा मेवाड़ के महाराणा बन गए. 
राणा सांगा ने मेवाड़ में 1509 से 1528 तक शासन किया, जो आज भारत के राजस्थान प्रदेश में स्थित है. राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध सभी राजपूतों को एक किया. राणा सांगा सही मायनों में एक वीर योद्धा व शासक थे जो अपनी वीरता और उदारता के लिये प्रसिद्ध हुए. इन्होंने दिल्ली, गुजरात, व मालवा मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य की ऱक्षा की. उस समय के वह सबसे शक्तिशाली राजा थे.

31 March 2022

भारत पर लोदी वंश का शासन

लोदी वंश खिलजी अफगान लोगों की पश्तून जाति से बना था. इस वंश ने दिल्ली के सल्तनत पर उसके अंतिम चरण में शासन किया. इन्होंने 1451 से 1526ईस्वी तक शासन किया.
 वे एक अफ़गान कबीले के थे, जो सुलेमान पर्वत के पहाड़ी क्षेत्र में रहता था और अपने पड़ोसी सूर, नियाजी और नूहानी कबीलों की ही तरह गिल्ज़ाई कबीले से जुड़ा हुआ था. गिल्ज़ाइयों में ताजिक या तुर्क रक्त का सम्मिश्रण था. पूर्व में मुल्तान और पेशावर के बीच और पश्चिम में गजनी तक सुलेमान पर्वत क्षेत्र में जो पहाड़ी निवासी फैले हुए थे लगभग 14वीं शताब्दी तक उनकी बिल्कुल

30 March 2022

दिल्ली पर सैयद वंश का शासन

सैयद वंश दिल्ली सल्तनत का चतुर्थ वंश था जिसका कार्यकाल 1414 से 1451ईस्वी तक रहा. तुग़लक़ वंश के बाद दिल्ली पर इस वंश की स्थापना हुई. 
यह परिवार सैयद अथवा मुहम्मद के वंशज माने जाता है. तैमूर के लगातार आक्रमणों के कारण दिल्ली सल्तनत का कन्द्रीय नेतृत्व पूरी तरह से हतास हो चुका था और उसे 1398 तक लूट लिया गया था. इसके बाद उथल-पुथल भरे समय में, जब कोई केन्द्रीय सत्ता नहीं थी, सैयदों ने दिल्ली में अपनी शक्ति का विस्तार किया. इस वंश के विभिन्न चार शासकों ने 37 वर्षों तक दिल्ली सल्तनत का नेतृत्व किया. इस वंश की

तैमूर लंग का भारत पर आक्रमण

भारत में विदेशी आक्रमणकारियों का लम्बा इतिहास रहा है. मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गज़नवी, मुहम्मद गोरी और चंगेज खान आदि भारत में आकर अपनी क्रूरता का दृश्य बता चुके थे. अगला नाम था एक तुर्क शासक का नाम था तैमूर लंग इसका जन्म उज्बेकिस्तान के समरकंद में 1336 मे हुआ था. 
वह एक साधारण चरवाहे परिवार में जन्म था, मगर दूसरा चंगेज खान बनकर वह काफिरों का नाश कर देने की सोच रखा करता है, कहते है दिल्ली को उसने एक दिन में मुर्दों

28 March 2022

चंगेज़ ख़ान का भारत की ओर प्रस्थान

चंगेज़ ख़ान एक मंगोल शासक था जिसने मंगोल साम्राज्य के विस्तार में एक अहम भूमिका निभाई. इतिहासकार मानते हैं कि चंगेज खान एक 'बौद्ध' था. उसने अपनी तलवार के दम पर मुस्लिम साम्राज्य को लगभग खत्म ही कर दिया था. वह अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता तथा साम्राज्य विस्तार के लिए प्रसिद्ध हुआ. इससे पहले किसी भी यायावर जाति (जाति के लोग भेड़ बकरियां पालते जिन्हें गड़रिया कहा जाता है) के व्यक्ति ने इतनी विजय यात्रा नहीं की थी. वह पूर्वोत्तर एशिया के कई घुमंतू जनजातियों को एकजुट करके सत्ता में आया. 

26 March 2022

दिल्ली पर तुगलक वंश का शासन

तुग़लक़ वंश  दिल्ली सल्तनत का एक राजवंश था जिसने सन् 1320 से लेकर सन् 1414 तक दिल्ली की सत्ता पर राज किया. तुग़लक़ वंश की स्थापना  गयासुद्दीन तुगलक के द्वारा किया गया था, जिसने 1412 तक राज किया. इस वंश में तीन योग्य शासक हुए. ग़यासुद्दीन (1320-25), उसका पुत्र मुहम्मद बिन तुग़लक़ (1325-51) और उसका उत्तराधिकारी फ़िरोज शाह तुग़लक़ (1351-87). इनमें से पहले दो शासकों का अधिकार क़रीब-क़रीब पूरे देश पर था. फ़िरोज का साम्राज्य उनसे छोटा अवश्य था, पर फिर भी अलाउद्दीन ख़िलजी के साम्राज्य से छोटा नहीं था. फ़िरोज की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत का विघटन हो गया और उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया. यद्यपि तुग़लक़ 1412 तक शासन करत रहे.

16 March 2022

भारत के महान वीरांगना पद्मावती जिन्होंने जौहर कर ली लेकिन खिलजी के अधिपत्य को कभी स्वीकार नही की

आज कहानी है एक ऐसे रानी की, जो इतिहास की सबसे चर्चित रानियों में से एक है. आज भी राजस्थान में चित्तौड़ की इस रानी की सुंदरता के साथ-साथ शौर्य और बलिदान के किस्से प्रसिद्ध हैं. लेकिन इन्हें ख्याति मिली कुछ वर्ष पूर्व जब उनके और क्रूर मुस्लिम शासक अलाउद्दीन खिलजी पर फ़िल्म बनी और पूरे इतिहास को तोड़ मरोड़ कर हमारे समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया. हम बात कर रहे हैं चितौड़ की शेरनी जिसे रानी पद्मावती के नाम से भी जानते हैं. 

15 March 2022

भारत पर खिलजी वंश का शासन

खिलजी वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था. इसने दिल्ली की सत्ता पर 1290-1320 इस्वी तक राज किया. दिल्ली की मुस्लिम सल्तनत में दूसरा शासक परिवार था, हालांकि ख़िलजी क़बीला लंबे समय से अफ़ग़ानिस्तान में बसा हुआ था, लेकिन अपने पूर्ववर्ती गुलाम वंश की तरह यह राजवंश भी मूलत: तुर्किस्तान का था. ख़लजी वंश के पहले सुल्तान जलालुद्दीन फ़िरोज़ ख़लजी, गुलाम वंश के अंतिम कमज़ोर बादशाह क्यूमर्श के पतन के बाद एक कुलीन गुट के सहयोग से गद्दी पर बैठे. जलालुद्दीन ख़िलजी ने ख़िलजी वंश की स्थापना की थी. ख़िलजी वंश ने 1290 से 1320 ई. तक राज्य किया.

12 March 2022

भारत की प्रथम महिला शासक रजिया सुल्तान

देश के इतिहास में रजिया सुल्तान का नाम भारत की प्रथम महिला शासक के तौर पर दर्ज है. दिल्ली सल्तनत के दौर में गुलाम वंश के शासन कल में जब बेगमों को सिर्फ महलो के अंदर आराम के लिए रखा जाता था वही रजिया सुल्तान महल से बाहर निकलकर अपने हक के लिए युद्ध किया और शासन की बागडोर सम्भाली. 
रजिया सुल्तान का जन्म दिल्ली सल्तनत के मशहूर शासक एवं इतिहास के प्रसिद्ध सुल्तान शमसुद्दीन इल्तुतमिश के घर हुआ था. रजिया को इतिहास में रज़िया अल-दीन और शाही नाम जलालत उद-दिन रज़िया से भी जाना जाता है. रजिया सुल्तान तीन भाइयों में इकलौती और सबसे काबिल थी. रजिया सुल्तान का बचपन का नाम हफ्सा मोइन था लेकिन सभी उसे रजिया कहकर ही पुकारते थे. उनके पिता इल्तुतमिश ने रजिया सुल्तान की प्रतिभा को बचपन में ही भाप लिया था और उन्हें भी अपने बेटों की तरह ही सैन्य प्रशिक्षण दिया एवं उसके अंदर एक कुशल प्रशासक बनने के सभी गुण विकसित किए थे.

07 March 2022

नो-फ्लाई जोन क्या है जिसकी यूक्रेन कर रहा मांग?

यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जे के लिए रूसी सेना द्वारा लगातार यूक्रेन के अलग-अलग शहरों पर हमले जारी हैं. अब तक इस जंग में सैकड़ों सैनिकों की मौत हो चुकी है. वहीं बहुत सारे बेगुनाह नागरिकों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. 
आपको बता दें कि रूस ने यूक्रेन के कई शहरों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है तथा इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं. नाटो के यूक्रेन को नो-फ्लाई जोन घोषित न करने पर राष्‍ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्‍की भड़के हुए हैं. नाटो देशों ने नो फ्लाई जोन के मुद्दे पर फैसला किया है कि वो यूक्रेन को इसके दायरे में नहीं लाएंगे.

25 February 2022

देखिए क्या है नाटो जिसके कारन रूस और यूक्रेन में जंग छिड़ चूका है

रूस और यूक्रेन के बीच जंग के बाद हालात तीसरे विश्वयुद्ध की ओर जा रहा है लेकिन इसके साथ ही एक शब्द फ़िज़ा में गूंज रहा है, नाटो. यूक्रेन को लेकर रूस की तल्ख़ी भी इसी नाटो की वजह से है. रूस हर हाल में यूक्रेन को नाटो दूर रखना चाहता है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो जाए. बस यही खींचतान हालात को जंग के मैदान तक ले आई. सवाल यही उठता है कि आखिर ये नाटो (NATO) है क्या आखिर अमेरिका यूक्रेन को नाटो में क्यों शामिल करना चाहता है और रूस इसका क्यों विरोध करता है?

10 February 2022

गुलाम वंश

कुतुबुद्दीन ऐबक :- (1206-1210)
1206 में महमूद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली के सिंहासन पर बैठा. इसी के साथ भारत में पहली बार गुलाम वंश की स्थापना हुई. कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्य अभिषेक 12 जून 1206 को हुआ. इसने अपनी राजधानी लाहौर को बनाया. कुतुबुद्दीन ऐबक कुत्त्बी तुर्क था. कुतुबुद्दीन ऐबक महमूद गौरी का गुलाम व दामाद था. कुतुबुद्दीन ऐबक ने यलदोज (गजनी) को दामाद, कुबाचा (मुलतान + सिंध) को बहनोई और इल्तुतमिश को अपना दामाद बनाया ताकि गौरी की मृत्यु के बाद सिंहासन का कोई और दावेदार ना बन सके. इसने अपने गुरु कुतुबद्दीन बख्तियार काकी की याद में कुतुब मीनार की नींव रखी परंतु वह इसका निर्माण कार्य पूरा नही करवा सका. इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार का निर्माण कार्य पूरा करवाया. दिल्ली में स्थित कवेट-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर का ढाई दिन का झोंपडा का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही करवाया था. कवेट-उल-इस्लाम मस्जिद भारत में निर्मित पहली मस्जिद थी. 1210 में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर इसकी मृत्यु हुई तथा इसे लाहौर में दफनाया गया था.

गुलाम वंश

गुलाम वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था. इस वंश का पहला शासक कुतुबुद्दीन ऐबक था जो मोहम्मद ग़ौरी का गुलाम था. ग़ुलामों को सैनिक सेवा के लिए ख़रीदा जाता था और मो. गौरी ने भी इसे खरीद कर लाया था. ये पहले ग़ौरी के सैन्य अभियानों के सहायक बने और फिर दिल्ली के सुल्तान. इन्होने गौरी की मृत्यु के बाद दिल्ली की सत्ता पर राज किया. कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्य अभिषेक 12जून 1206 को हुआ. इस वंश ने दिल्ली की सत्ता पर 1206 से 1290 ईस्वी तक राज किया तथा भारत में इस्लामी शासन की नींव डाली. इससे पूर्व किसी भी मुस्लिम शासक ने भारत में लंबे समय तक प्रभुत्व कायम नहीं किया था. इसी समय चंगेज खाँ के नेतृत्व में भारत के उत्तर पश्चिमीक्षेत्र पर मंगोलों का आक्रमण भी हुआ था. इस वंश के निम्नलिखित शासक हुए:

मो. गौरी का गुलाम और गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक

क़ुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली सल्तनत के संस्थापक और ग़ुलाम वंश के पहले सुल्तान थे. 1206 में महमूद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली के सिंहासन पर बैठा. इसी के साथ भारत में पहली बार गुलाम वंश की स्थापना हुई. कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्य अभिषेक 12जून 1206 को हुआ. इसने अपनी राजधानी लाहौर को बनाया. ये ग़ौरी साम्राज्य के सुल्तान मुहम्मद ग़ौरी का गुलाम था. ग़ुलामों को सैनिक सेवा के लिए ख़रीदा जाता था. ये पहले ग़ौरी के सैन्य अभियानों के सहायक बने और फिर दिल्ली के सुल्तान. क़ुतुबुद्दीन तुर्किस्तान के निवासी थे और इनके माता पिता तुर्क थे. इस क्षेत्र में उस समय दास व्यापार का प्रचलन था और इसे लाभप्रद माना जाता था. दासों को उचित शिक्षा और प्रशिक्षण देकर उन्हें राजा के हाथ बेचना एक लाभदायी धन्धा था. बालक कुतुबुद्दीन इसी व्यवस्था का शिकार बना और उसे एक व्यापारी के हाथों बेच डाला गया. व्यापारी ने उसे फ़िर निशापुर के का़ज़ी फ़ख़रूद्दीन अब्दुल अज़ीज़ कूफी को बेच दिया. अब्दुल अजीज़ ने बालक क़ुतुब को अपने पुत्र के साथ सैन्य और धार्मिक प्रशिक्षण दिया. पर अब्दुल अज़ीज़ की मृत्यु के बाद उसके पुत्रों ने उसे फ़िर से बेच दिया और अंततः उसे मुहम्मद ग़ोरी ने ख़रीद लिया.

27 January 2022

गणतंत्र दिवस



गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है. इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था. एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था. 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था.

25 January 2022

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

भारत में प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है. राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने का उद्देश्य युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना है. मतदान करना प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का अधिकार है क्योंकि प्रत्येक वोट नई सरकार और लोकतंत्र के भाग्य का फैसला करता है. इस दिन, विभिन्न भाषण प्रतियोगिताओं, अभियान, नए मतदाताओं को वोटर आईडी वितरण, मतदाताओं की फोटोग्राफी, आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को हुई थी. राष्ट्रीय मतदाता दिवस पहली बार 25 जनवरी, 2011 को मनाया गया था. यह चुनाव आयोग का 61वां स्थापना दिवस था.

24 January 2022

राष्ट्रीय बालिका दिवस

राष्ट्रीय बालिका दिवस  प्रत्येक साल 24 जनवरी को देश भर में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य देश की लड़कियों को हर लिहाज से अधिक से अधिक सहायता और सुविधाएं प्रदान करना है. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय बालिका दिवस का एक अन्य उद्देश्य लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर लोगों को जागरूक करना है. 
ऐसा माना जाता है कि हमारे समाज की लड़कियां आज से नहीं बल्कि हमेशा से जीवन के हर मामले में पक्षपात का सामना करती आ रही हैं. राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के पीछे

23 January 2022

सुभाष चन्द्र बोस जयंती

आज स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है. नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को ओड़िशा के कटक शहर में हिन्दू कायस्थ परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था. जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे. अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था. सुभाष चन्द्र बोस 
कटक के प्रोटेस्टेण्ट स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर 1909 में  रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में दाखिला लिया. कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का सुभाष के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ा. मात्र

14 January 2022

महर्षि वेदव्यास की कहानी

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता थे. कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महर्षि पराशर और सत्यवती के पुत्र थे. महाभारत ग्रंथ का लेखन भगवान् गणेश ने महर्षि वेदव्यास से सुन सुनकर किया था. वेदव्यास महाभारत के रचयिता ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं के साक्षी भी रहे हैं, जो क्रमानुसार घटित हुई हैं. अपने आश्रम से हस्तिनापुर की समस्त गतिविधियों की सूचना उन तक तो पहुंचती थी. वे उन घटनाओं पर अपना परामर्श भी देते थे. जब-जब अंतर्द्वंद्व और संकट की स्थिति आती थी, माता सत्यवती उनसे विचार-विमर्श के लिए कभी आश्रम पहुंचती, तो कभी हस्तिनापुर के राजभवन में आमंत्रित करती थी. 

जरासंध की कहानी

जरासंध महाभारत कालीन मगध राज्य के नरेश थे. सम्राट जरासंध ने बहुत से राजाओं को अपने कारागार में बंदी बनाकर रखा था पर उसने किसी को भी मारा नहीं था. इसका कारण यह था कि वह चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा हेतु ही वह इन राजाओं को बंदी बनाकर रख रहा था ताकि जिस दिन 101 राजा हों और वे महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी बलि दे सके. 
वह मथुरा के नरेश कंस का ससुर एवं परम मित्र था उसकी दोनो पुत्रियो अस्ति और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था. श्रीकृष्ण से कंस के वध का प्रतिशोध लेने के लिए उन्होंने 17 बार मथुरा पर चढ़ाई की लेकिन जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा छोड़ कर जाना पड़ा फिर वो द्वारिका जा बसे, तभी वे नाम रणछोड़ कहलाये.