07 March 2022

नो-फ्लाई जोन क्या है जिसकी यूक्रेन कर रहा मांग?

यूक्रेन की राजधानी कीव पर कब्जे के लिए रूसी सेना द्वारा लगातार यूक्रेन के अलग-अलग शहरों पर हमले जारी हैं. अब तक इस जंग में सैकड़ों सैनिकों की मौत हो चुकी है. वहीं बहुत सारे बेगुनाह नागरिकों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. 
आपको बता दें कि रूस ने यूक्रेन के कई शहरों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है तथा इमारतें खंडहर में तब्दील हो गई हैं. नाटो के यूक्रेन को नो-फ्लाई जोन घोषित न करने पर राष्‍ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्‍की भड़के हुए हैं. नाटो देशों ने नो फ्लाई जोन के मुद्दे पर फैसला किया है कि वो यूक्रेन को इसके दायरे में नहीं लाएंगे.

आपको बता दें कि जिस इलाके में जब किसी अनधिकृत विमान को उड़ने की इजाजत नहीं दी जाती है तो उसे नो फ्लाई जोन कहा जाता है. इसका निर्धारण सामान्य तौर पर सैन्य ताकतें करती हैं. मुख्य रूप से इस तरह के जोन का निर्माण लड़ाई के वक्त किया जाता है. इस जोन में किसी तरह के विमान के संचालन की अनुमति नहीं होती है. जबकि इसके विपरीत एयरस्‍पेस बंद करने का अर्थ यह होता है कि केवल वाणिज्यिक विमानों के संचालन पर रोक लगाई जाती है.

यूक्रेन को नो फ्लाई जोन बनाने में परेशानी क्या है?
दरअसल नाटो देशों को लगता है कि इस फैसले के कारण से पूरे यूरोप पर खतरा ज्यादा बढ़ जाएगा. नाटो के इस कदम को रूस खुद के विरुद्ध लड़ाई मानेगा और वैसी सूरत में नाटो तथा उसमें लड़ाई हो सकती है. नो-फ्लाई जोन घोषित करने का अर्थ यह भी है कि नाटो पायलट्स रूसी एयरक्राफ्ट्स को बर्बाद कर सकते हैं. आपको बता दें कि जब नो फ्लाई जोन घोषित किया जाएगा तो उस वक्त नाटो को मिशन को कामयाब बनाने हेतु रीफ्यूलिंग टैंकर्स एवं इलेक्‍ट्रॉनिक सर्विलांस एयरक्राफ्ट तैनात करने होंगे. नाटो अपने साजो सामान की सुरक्षा हेतु मुल्कों को जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को नष्‍ट करना होगा तथा उसकी वजह से तनाव और ज्यादा बढ़ जाएगा.

पश्चिमी देशों ने सबसे पहले साल 1991 में खाड़ी युद्ध के बाद इराक के कई हिस्‍सों में नो-फ्लाई जोन बनाया था. इसके अतिरिक्त 1993-95 के बीच बोस्निया एवं हर्जगोविना में सिविल वॉर के दौरान भी नो-फ्लाई जोन बनाए गए. आखिरी बार साल 2011 में लीबिया में गृह युद्ध के दौरान भी नो-फ्लाई जोन घोषित किए गए.

No comments:

Post a Comment