30 May 2022

राजा दाहिर सिंह लोधी

राजा दाहिर सिंह लोधी सिंध के अंतिम हिंदू राजा थे. उनके समय में ही अरबों ने सर्वप्रथम सन 712 में भारत (सिंध) पर आक्रमण किया था. मुहम्मद बिन क़ासिम मिशन सिंध पर आक्रमण किया था जहां पर राजा दहिर सिंह ने उसे रोका और उसके साथ युद्ध लड़ा उनका शासन काल 663 से 712 ईसवी तक रहा. उन्होंने अपने शासनकाल में अपने सिंध प्रांत को बहुत ही मजबूत बनाया. इस समय अरब में खलीफा शासन लागु हो गया था और खलीफा मोहम्मद साहब के पारिवारिक सदस्य हुसैन इब्न अली और अन्य लोगों मारना चाहता था तो उन लोगो ने इनसे शरण मांगी, इन्होंने उनको शरण दी. जब खलीफा को मालूम चला की दाहिर सिंह लोधी ने हुसैन इब्न अली को शरण दी है तो खलीफा ने जनरल हज्जाज को फौजी दस्ते के साथ राजा दाहिर सेन पर आक्रमण करने के लिए भेजा.

खलीफा के आदेश पर जनरल हज्जाज अपनी सेना लेकर सिंध प्रान्त पर आक्रमण कर दिया तो राजा दाहिर सिंह ने उसको मार के भगा दिया. फिर अरब के खलीफा ने मोहम्मद बिन कासिम को भेजा और कासिम को मालूम था की इनसे ऐसे जितना मुस्किल है जिसके कारण कासिम ने इनके एक सिपहसालार को दाहिर को मारने के बाद उसे गद्दी पर बैठाने का ख्वाब दिखाया. जिससे उस सिपहसालार ने राज दाहिर सिंह लोधी के साथ गद्दारी की इस कारण इनको हार का मुंह देखना पड़ा. राजा दाहिर सिंह लोधी अपने जीवन काल में कभी नही हारे थे. मुहम्मद बिन कासिम ने राजा दाहिर को शिकस्त दी और यहां अपना शासन स्थापित किया. 712 में सिंधु नदी के किनारे उनकी मौत हो गयी. इनके पुत्र जय सिंह भी 712 मे मारे गए.

राजा दाहिर सेन की मृत्यु के बाद इनके दो बेटियों को ख़लीफ़ा के पास भेज दिया गया, ख़लीफ़ा बिन अब्दुल मालिक ने दोनों बेटियों को एक दो रोज़ आराम करने के बाद उनके हरम में लाने का आदेश दिया. एक रात दोनों को ख़लीफ़ा के हरम में बुलाया गया, ख़लीफ़ा ने अपने एक अधिकारी से कहा कि वो मालूम करके बताएं कि दोनों में कौन सी बेटी बड़ी है. बड़ी ने अपना नाम सूर्या देवी बताया और उसने चेहरे से जैसे ही नक़ाब हटाया तो ख़लीफ़ा उनकी ख़ूबसूरती देखकर दंग रह गए और लड़की को हाथ से अपनी तरफ़ खींचा लेकिन लड़की ने ख़ुद को छुड़ाते हुए कहा, “बादशाह सलामत रहें, मैं बादशाह की क़ाबिल नहीं क्योंकि आदिल इमादुद्दीन मोहम्मद बिन क़ासिम ने हमें तीन रोज़ अपने पास रखा और उसके बाद ख़लीफ़ा की ख़िदमत में भेजा है. शायद आपका दस्तूर कुछ ऐसा है, बादशाहों के लिए ये बदनामी जायज़ नहीं.”

इतिहासकार के मुताबिक़ ख़लीफ़ा वलीद बिन अब्दुल मालिक, मोहम्मद बिन क़ासिम से बहुत नाराज़ हुए और आदेश जारी किया कि वो संदूक़ में बंद होकर हाज़िर हों. जब ये फ़रमान मोहम्मद बिन क़ासिम को पहुंचा तो वो अवधपुर में थे. तुंरत आदेश का पालन किया गया लेकिन दो रोज़ में ही उनका दम निकल गया और उन्हें दरबार पहुंचा दिया गया. राजा दाहिर की बेटियों ने इस तरह अपना बदला लिया. इसके बाद राजा दाहिर सेन की दोनों बेटियों को भी खलीफा के द्वारा दीवाल में चुनवा दिया गया. इस प्रकार दोनों बहन शहीद हो गई.

No comments:

Post a Comment