13 June 2022

मोतीलाल नेहरू

मोतीलाल नेहरू प्रयागराज के एक प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं ब्रिटिशकालीन राजनेता थे. वे भारत के प्रथम प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू के पिता थे. वे भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के आरम्भिक कार्यकर्ताओं में से थे. जलियांवाला बाग काण्ड के बाद 1919 में अमृतसर में हुई कांग्रेस के वे पहली बार अध्यक्ष बने और फिर 1928 में कलकत्ता में दोबारा कांग्रेस के अध्यक्ष बने. 
मोतीलाल नेहरू का जन्म 6 मई 1861 को आगरा में हुआ था. उनके पिता का नाम गंगाधर था. वह पश्चिमी ढँग की शिक्षा पाने वाले प्रथम पीढ़ी के गिने-चुने भारतीयों में से थे. वह इलाहाबाद के म्योर केंद्रीय महाविद्यालय में शिक्षित हुए किन्तु बी०ए० की अन्तिम परीक्षा नहीं दे पाये. बाद में उन्होंने कैम्ब्रिज से "बार ऐट लॉ" की उपाधि ली और अंग्रेजी न्यायालयों में अधिवक्ता के रूप में कार्य प्रारम्भ किया.

पं. मोतीलाल नेहरू के पिता पंडित गंगाधर नेहरू, जब दिल्ली में लूटपाट और कत्ले आम मचा था, अपना सब कुछ छोड़कर अपने परिवार को लेकर किसी तरह सुरक्षित रूप से आगरा पहुंच गए थे. लेकिन वह आगरा में अपने परिवार को स्थायी रूप से जमा नहीं पाए थे कि सन् 1861 में केवल चौंतीस वर्ष की छोटी-सी आयु में ही वह अपने परिवार को लगभग निराश्रित छोड़कर इस संसार से कूच कर गए. पंडित गंगाधर नेहरू की मृत्यु के तीन महीने बाद 6 मई 1861 को पंडित मोतीलाल नेहरू का जन्म हुआ था. पंडित गंगाधर नेहरू के तीन पुत्र थे. सबसे बड़े पंडित बंसीधर नेहरू थे, जो भारत में विक्टोरिया का शासन स्थापित हो जाने के बाद तत्कालीन न्याय विभाग में नौकर हो गए. उनसे छोटे पंडित नंदलाल नेहरू थे जो लगभग दस वर्ष तक राजस्थान की एक छोटी-सी रियासत 'खेतड़ी' के दीवान रहे. बाद में वह आगरा लौट आए. उन्होंने आगरा में रहकर क़ानून की शिक्षा प्राप्त की और फिर वहीं वकालत करने लगे. इन दो पुत्रों के अतिरिक्त तीसरे पुत्र पंडित मोतीलाल नेहरू थे. पंडित नन्दलाल नेहरू ने ही अपने छोटे भाई मोतीलाल का पालन-पोषण किया और पढ़ाया-लिखाया. पंडित नन्दलाल नेहरू की गणना आगरा के सफल वकीलों में की जाती थी. उन्हें मुक़दमों के सिलसिले में अपना अधिकांश समय इलाहाबाद में हाईकोर्ट बन जाने के कारण वहीं बिताना पड़ता था. इसलिए उन्होंने इलाहाबाद में ही एक मकान बनवा लिया और अपने परिवार को लेकर स्थायी रूप से इलाहाबाद आ गए और वहीं रहने लगे. 

जब मोतीलाल नेहरू 25 वर्ष के थे तो उनके बड़े भाई का निधन हो गया. मोतीलाल नेहरू की पत्नी का नाम स्वरूप रानी था. जवाहरलाल नेहरू उनके एकमात्र पुत्र थे. उनके दो कन्याएँ भी थीं. उनकी बडी बेटी का नाम विजयलक्ष्मी था, जो आगे चलकर विजयलक्ष्मी पण्डित के नाम से प्रसिद्ध हुई. उनकी छोटी बेटी का नाम कृष्णा था जो बाद में कृष्णा हठीसिंह कहलायीं.

मोतीलाल नेहरु ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में कार्य किया था. 1923 में उन्होने देशबंधु चित्तरंजन दास के साथ काँग्रेस पार्टी से अलग होकर अपनी स्वराज पार्टी की स्थापना की. 1928 में कोलकाता में हुए काँग्रेस अधिवेशन के वे अध्यक्ष चुने गये. 1928 में काँग्रेस द्वारा स्थापित भारतीय संविधान आयोग के भी वे अध्यक्ष बने. इसी आयोग ने नेहरू रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. मोतीलाल नेहरू ने इलाहाबाद में एक अलीशान घर बनवाया और उसका नाम आनंद भवन रखा. इसके बाद उन्होंने अपना पुराना वाला घर स्वराज भवन काँग्रेस दल को दे दिया. मोतीलाल नेहरू का 1931 में इलाहाबाद में निधन हुआ.

No comments:

Post a Comment