मासिक करेंट अफेयर्स

25 November 2021

तीनों कृषि कानून वापस लेने के बाद भी किसान MSP को लेकर आन्दोलन पर अडिग है, ये MSP क्या है? समझिए जिसपर हो रहा है इतना हंगामा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश पर्व के दिन तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर दिया लेकिन किसानों ने कहा है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जबतक सरकार MSP की गारंटी नहीं देती. कड़ाके की ठंड और भूख-प्यास की परवाह किए बिना देश का अन्नदाता कहा जाने वाला किसान पिछले एस साल से भी ज्यादा दिनों से सड़कों पर है. अपने घर की सुख-सुविधाएं छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर हजारों किसान दिल्ली के बॉडर्र की सड़कों पर डेरा जमाए हुए बैठे हैं. किसानों के आंदोलन में एक चीज बार-बार निकल कर सामने आ रही है और वह है फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी. आज बहुत से लोग वाकिफ नहीं होंगे कि ये एमएसपी क्या होता है या फिर ये कैसे तय किया जाता है, इससे किसानों को क्या फायदा है. यहां हम आपको तफ्सील के साथ बता रहे हैं कि ये एमएसपी क्या है और इसे तय करने का फार्मूला क्या है.

24 November 2021

गुरु तेग बहादुर सिंह जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए शहीद हो गये लेकिन कभी मुगलो के आधिपत्य को स्वीकार नहीं किया

भारत में सभी धर्मों को समान नजर से देखा जाता है लेकिन यह कथन हमेशा सिर्फ कागजी ही लगता है. इतिहास गवाह है कि भारत में धर्म के नाम पर बहुत ही क्रुर दंगे हुए हैं. यह दंगे ना सिर्फ भारत की धर्म-निरपेक्षता पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करते हैं बल्कि यह दंगे उस देश में हो रहे हैं जहा महापुरुषों ने अपने जीवन का बलिदान तक देकर धर्म की रक्षा की है. धर्म के नाम पर मर मिटने की जब भी बात होती है तो सिख समुदाय के गुरुतेग बहादुर जी का नाम बड़ी ही इज्जत और सम्मान के साथ लिया जाता है. अपने धर्म के नाम पर उन्होंने अपने सिर को भी कुर्बान कर दिया. आज उनका बलिदान दिवस है तो चलिए जानते हैं उनके बारें में कुछ बातें.

23 November 2021

संसद में कैसे होगा कृषि कानून वापस? क्या है वैधानिक प्रक्रिया और तरीका?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश पर्व के दिन तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर दिया है. हालांकि, किसानों ने कहा है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि संसद से कानून वापस नहीं हो जाता. ऐसे में सवाल यह उठता है कि अब ये कानून संसद से कब वापस होंगे? और कानून वापसी की क्या प्रक्रिया है?

गुरु नानक जयंती के अवसर पर पीएम मोदी ने तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु नानक जयंती के मौके पर बड़ा ऐलान करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की. बीते कई महीनों से जारी किसानों के आंदोलन को देखते हुए सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया था. 
देश के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने किसानों से अब घर लौटने की अपील की और कहा कि इस कानून को खत्म करने प्रक्रिया शीतकालीन सत्र में शुरू हो जाएगी. पीएम मोदी ने कहा कि हमारी तपस्या में ही कमी रही होगी, जिसकी वजह से हम कुछ किसानों को नहीं समझा पाए. 

21 November 2021

देखिए चंद्रगुप्त मौर्य ने किस प्रकार किया मौर्य साम्राज्य की स्थापना

मौर्य वंश द्वारा स्थापित मौर्य साम्राज्य ने प्राचीन भारत में 322 ईसा पूर्व से 187 ईसा पूर्व तक प्रभुत्व कायम किया था. यह किसी भी भारतीय राजवंश द्वारा स्‍थापित किया गया सबसे बड़ा साम्राज्‍य बन गया. मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र जो अब पटना कहा जाता है में थी और साम्राज्य पूर्व की ओर भारत-गंगा योजना में मगध में विस्तारित था. यह राज्‍य अशोक के शासनकाल के दौरान पांच मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अब तक का सबसे बड़ा साम्राज्य है.

20 November 2021

मगध सम्राज्य पर शिशुनाग राजवंश की स्थापना

मगध में हर्यक वंश के राजा नागदशक को उसका सेनापति शिशुनाग ने राज्य विद्रोह कर 492 ई.पू. में हत्या कर दिया और स्वंय मगध का राजा बन गया और मगध पर इस प्रकार शिशुनाग वंश की स्थापना की. शिशुनाग लिच्छवि राजा के वेश्या पत्‍नी से उत्पन्‍न पुत्र था. पुराणों के अनुसार वह क्षत्रिय था. इसने सर्वप्रथम मगध के प्रबल प्रतिद्वन्दी राज्य अवन्ति पर आक्रमण कर उसे अपने राज्य में मिलाया. मगध की सीमा पश्‍चिम मालवा तक फैल गई और वत्स को मगध में मिला दिया. वत्स और अवन्ति के मगध में विलय से, पाटलिपुत्र को पश्‍चिमी देशों से व्यापारिक मार्ग के लिए रास्ता खुल गया.

शिशुनाग ने मगध से बंगाल की सीमा से मालवा तक विशाल भू-भाग पर अधिकार कर लिया. शिशुनाग एक शक्‍तिशाली शासक था जिसने गिरिव्रज के अलावा वैशाली नगर को भी अपनी राजधानी बनाया. 394 ई.पू. में इसकी मृत्यु हो गई जिसके बाद उसका पुत्र कालाशोक मगध का शासक बना. महावंश में इसे कालाशोक तथा पुराणों में काकवर्ण कहा गया है. कालाशोक ने अपनी राजधानी को पाटलिपुत्र स्थानान्तरित कर दिया था. इसने 28 वर्षों तक शासन किया. कालाशोक के शासनकाल में ही बौद्ध धर्म की द्वितीय संगीति का आयोजन हुआ. कालाशोक को राजधानी पाटलिपुत्र में घूमते समय महापद्यनन्द नामक व्यक्‍ति ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी. 366 ई.पू. कालाशोक की मृत्यु हो गई. कालाशोक के दस पुत्र थे, जिन्होंने मगध पर 22 वर्षों तक शासन किया. शिशुनाग वंश का अंतिम राजा महानन्दि था. महानन्दि का हत्या उसी के शूद्र दासी के साथ हुए पुत्र महापद्मनन्द द्वारा नगर विहार के दौरान कर दी गई और महापद्मनन्द मगध का राजा बनकर नन्द वंश की स्थापना की. इस प्रकार 344 ई.पू. में शिशुनाग वंश का अन्त हो गया और नन्द वंश का उदय हुआ.

19 November 2021

पीएम मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 
योगी सरकार द्वारा लखनऊ से गाजीपुर तक बनाए गए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण  मंगलवार को सुलतानपुर के कूड़ेभार क्षेत्र से किया. इस अवसर पर एक्सप्रेस-वे की हवाई पट्टी पर वायुसेना की ओर से एयरशो भी किया गया, जिसमें मिराज, जगुआर और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों ने यहां उतरकर उड़ान भरी और हवाई करतब से रोमांचक युद्ध कौशल भी दिखाया. वायुसेना के हरक्यूलिस विमान से एक्सप्रेस-वे की ही हवाई पट्टी पर उतरे पीएम मोदी ने कहा कि जितनी जरूरी देश की समृद्धि है, उतनी ही जरूरी देश की सुरक्षा भी है. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे वायुसेना के लिए एक और ताकत बन गया है. यहां जरूरत पर फाइटर प्लेन उतरेंगे. पीएम मोदी ने र्वांचल एक्सप्रेस-वे को उत्तर प्रदेश के विकास और नए यूपी के निर्माण का एक्सप्रेस-वे बताते हुए दावा

इश्क के दरिया में डूबकर फ़ना हो जाने वाले रोमियो की क्या थी प्रेम कहानी

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के सिंहासन पर बैठते ही मनचले युवकों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है. पुलिस की टीम दल-बल के साथ बड़े बाज़ारों और पार्कों में ऐसे युवा युगल जोड़ियों की तलाश कर रहे हैं. सरकार ने पुलिस के इस दल का नाम रखा है – ऐंटी रोमियो स्क्वाड. लेकिन जब से प्रदेश में यह स्‍क्‍वायड शुरू हुआ है तब से रोमियो के बारे में जानने की लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है. लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अपनी प्रेमिका जूलियट के साथ इश्‍क फरमाने वाला यह रोमियो असल में कौन था?

गुरू नानक जयंती

सिख धर्म के संस्थापक बाबा गुरू नानक देव की जयंती आज 19नवंबर को दुनिया भर में मनाई गई. सिख समुदाय के लिए ये दिन बहुत ही विशेष है. सिखों के प्रथम गुरु नानकदेवजी की जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है. गुरू नानक सिखों के प्रथम गुरु (आदि गुरु) हैं. इनके अनुयायी इन्हें गुरु नानक, गुरु नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं. गुरुनानाक देव जी का जन्म रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था. तलवंडी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया. ननकाना साहिब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है. गुरु नानक 20 अगस्त, 1507 को सिक्खों के प्रथम गुरु बने एंव इस पद पर 22 सितम्बर, 1539 तक रहे. गुरुनानक का व्यक्तित्व असाधारण था. उनमें पैगम्बर, दार्शनिक, राजयोगी, गृहस्थ, त्यागी, धर्म-सुधारक, समाज-सुधारक, कवि, संगीतज्ञ, देशभक्त, विश्वबन्धु सभी के गुण उत्कृष्ट मात्रा में विद्यमान थे. उनमें विचार-शक्ति और क्रिया-शक्ति का अपूर्व सामंजस्य था. उन्होंने पूरे देश की यात्रा की. लोगों पर उनके विचारों का असाधारण प्रभाव पड़ा. उनमें सभी गुण मौजूद थे. पैगंबर, दार्शनिक, राजयोगी, गृहस्थ, त्यागी, धर्मसुधारक, कवि, संगीतज्ञ, देशभक्त, विश्वबंधु आदि सभी गुण जैसे एक व्यक्ति में सिमटकर आ गए थे. उनकी रचना 'जपुजी' का सिक्खों के लिए वही महत्त्व है जो हिंदुओं के लिए गीता का है.

स्पेशल ट्रेन और स्पेशल किराया अब खत्म, रेलवे बोर्ड ने लिया फैसला

देश में कोरोना के मामलों में कमी के बाद व कोरोना वैक्सीनेशन के बाद रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है. जिन ट्रेनों को स्पेशल ट्रेनों के तौर पर अब तका चलाया जा रहा था, उन सभी ट्रेनों को अब रेलवे ने नियमित कर दिया है. साथ ही रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों में लगने वाले अलग से चार्ज को भी हटा दिया है. ऐसे में अब यात्री पुरानी दरों पर ट्रेनों में सफर कर पाएंगे. शुक्रवार रात इसके आदेश रेलवे बोर्ड ने जारी का दिया है. 
गौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण रेलवे ने मेल, एक्सप्रेस, स्पेशल और हालीडे-डे ट्रेन को स्पेशल ट्रेन बनाकर चला रहा था. साथ ही रेलवे अलग से चार्ज भी ले रहा था. रेलवे ने कोरोना स्थिति में सुधार होने के बाद अब सामान्य परिचालन बहाल करने का फैसला किया है.