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14 October 2017

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 100वे स्थान पर

भारत में भूख एक गंभीर समस्या है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत 119 देशों की सूची में 100वें पायदान पर है. इस मामले में देश को फिर शर्मिंदा होना पड़ा है. दरअसल भूख का स्तर इतना गंभीर है कि सामाजिक क्षेत्र को इसके प्रति अधिक प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत है. उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) द्वारा जारी इस साल की रिपोर्ट के अनुसार 119 देशों के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत तीन पायदान नीचे खिसककर 100 स्थान पर पहुंच गया है. पिछले साल भारत इस सूचकांक (इंडेक्स) में 97वें पायदान पर था. ख़ास बात यह है कि इस मामले में भारत उत्तर कोरिया, बांग्लादेश, नेपाल म्यांमार जैसे देशों से भी पीछे है. लेकिन पाकिस्तान अफगानिस्तान से आगे है. बता दें कि यह बात देश के लिए चिंताजनक है कि 31.4 स्कोर के साथ भारत का वर्ष 2017 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स अंक ऊंचाई की तरफ गंभीर श्रेणी में पहुँच गया है. रिपोर्ट के अनुसार इस सूचकांक में चीन की रैंकिंग 29, नेपाल 72, म्यांमार 77, श्रीलंका 84 बांग्लादेश 88 स्थान पर हैं अर्थात भारत इन पड़ोसी देशों से भी पीछे है. 

इस सूची में पिछले साल भारत 97वें पायदान पर था. विश्व के 119 देशों की सूची में भारत एशिया में तीसरा सबसे पिछड़ा देश है. यहां तक कि उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और इराक से भी पीछे है, लेकिन पाकिस्तान से आगे है. केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान की हालत ही सबसे ज्यादा खराब हैं. इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 31.4 स्कोर के साथ भारत का साल 2017 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स अंक ऊंचाई की तरफ और गंभीर श्रेणी में है. साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों में कुपोषण की उच्च दर से देश में भूख का स्तर इतना गंभीर है और सामाजिक क्षेत्र को इसके प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया इस साल ग्लोबल हंगर इंडेक्स में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में से एक है. इस लिस्ट में पाकिस्तान 106वें स्थान पर और अफगानिस्तान 107वें स्थान पर हैं. वहीं भारत इस लिस्ट में उत्तर कोरिया, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों से भी पीछे है. रिपोर्ट के अनुसार इस लिस्ट में चीन 29वें स्थान पर, नेपाल 72, म्यांमार 77, श्रीलंका 84 और बांग्लादेश 88वें स्थान पर हैं.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स: अलग-अलग देशों में लोगों को खाने की चीज़ें कैसी और कितनी मिलती हैं यह उसे दिखाने का साधन है. 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' का सूचकांक हर साल ताज़ा आंकड़ों के साथ जारी किया जाता है. इस सूचकांक के ज़रिए विश्व भर में भूख के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान की उपलब्धियों और नाकामियों को दर्शाया जाता है. इस तरह के सर्वेक्षण की शुरुआत इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने की और वेल्ट हंगरलाइफ़ नामक एक जर्मन स्वयंसेवी संस्थान ने इसे सबसे पहले वर्ष 2006 में जारी किया था. वर्ष 2007 से इस अभियान में आयरलैंड का भी एक स्वयमसेवी संगठन शामिल हो गया. इस बार से रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित 2030 के एजेंडे से भी जोड़ा गया है जिसमे 'जीरो हंगर' का लक्ष्य रखा गया है. 'ग्लोबल इंडेक्स स्कोर' ज़्यादा होने का मतलब है उस देश में भूख की समस्या अधिक है. उसी तरह किसी देश का स्कोर अगर कम होता है तो उसका मतलब है कि वहाँ स्थिति बेहतर है. इसे नापने के चार मुख्य पैमाने हैं - कुपोषण, शिशुओं में भयंकर कुपोषण, बच्चों के विकास में रुकावट और बाल मृत्यु दर.

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