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22 December 2017

संसद से पास हुआ आईआईएम स्वायत्तता विधेयक

देश के सभी 20 भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) अब स्वायत्त हो गए हैं. इन संस्थानों में अब सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकेगी. इनमें सरकार की भूमिका को सीमित करने संबंधी भारतीय प्रबंध संस्थान विधेयक 2017 को राज्यसभा ने पास कर दिया है. यह बिल लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है. अब इसे हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद यह पूर्ण रूप से अमल में आ जाएगा. इससे आईआईएम संस्थानों को कई विशेषाधिकार मिल जाएंगे.

राज्यसभा के पटल पर आईआईएम स्वायत्तता विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अब आईआईएम में कोई सरकारी या नौकरशाही दखलअंदाजी नहीं होगी, ताकि ये संस्थान बेहतर प्रदर्शन कर सकें. इस बिल का सभी पार्टियों ने समर्थन किया और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया. इस बिल पर बहस करते हुए कुछ सासंदों ने आईआईएम में नए कोर्स शुरू कराने की मांग की. उनका कहना था कि आईआईएम में ज्यूडिशियल मैनेजमेंट और टेंपल मैनेजमेंट (मंदिर प्रबंधन) जैसे कोर्स भी शुरू होने चाहिए, ताकि देश के हजारों मंदिरों की देखरेख प्रोफेशनल तरीके से हो सके.

आईआईएम अब अपने निदेशकों, फैकल्टी सदस्यों की नियुक्ति करने के अलावा संस्थान अब यहां पढ़ाई करने वालों को डिप्लोमा की जगह डिग्री दे सकेंगे और पीएचडी की उपाधि भी प्रदान कर सकेंगे. साथ ही पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर सभी आईआईएम बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की नियुक्ति भी कर सकेंगे. इन संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित कर विजिटर का पद समाप्त कर दिया गया है. राष्ट्रपति अभी इन संस्थानों के विजिटर होते हैं. स्वायत्तता से इतर इन संस्थानों का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा ऑडिट किया जाएगा और कैग की रिपोर्ट पर जरूरत महसूस होने पर संसद में चर्चा भी की जाएगी.

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