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29 August 2018

रक्षा मंत्रालय ने 46,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी प्रदान की

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की 25 अगस्त 2018 को बैठक हुई और इसमें लगभग 46,000 करोड़ रुपये के बराबर की रक्षा खरीद सेवाओं को मंजूरी दी गई. रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने एक ऐतिहासिक निर्णय में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक के मूल्य से भारतीय नौसेना के लिए 111 यूटिलिटी हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी. यह रक्षा मंत्रालय के प्रतिष्ठित सामरिक साझीदारी (एसपी) मॉडल के तहत पहली परियोजना है जिसका लक्ष्य सरकार के ‘मेक इन इंडिया‘ कार्यक्रम को उल्लेखनीय प्रोत्साहन देना है.

यह रक्षा मंत्रालय के प्रतिष्ठित सामरिक साझेदारी (एसपी) मॉडल के तहत पहली परियोजना है जिसका लक्ष्य सरकार के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम में महत्वपूर्ण रूप से भरना है. एसपी मॉडल में एक भारतीय रणनीतिक साझेदार द्वारा प्रमुख रक्षा प्लेटफार्मों के स्वदेशी विनिर्माण की परिकल्पना की गई है, जो विदेशी OEM के साथ सहयोग करेंगे, विशिष्ट तकनीकों का अधिग्रहण करेंगे और देश में उत्पादन सुविधाओं की स्थापना करेंगे. रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 24,879.16 करोड़ रुपये के कुछ अन्य रक्षा खरीद प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी. इसमें थल सेना के लिये 150 पूरी तरह से स्वदेश में डिजाइन और विकसित 155 एमएम व्यास की नाल वाली उन्नत तोपों की खरीद का प्रस्ताव भी शामिल है. इसकी लागत करीब 3,364 करोड़ रुपये है. यह तोप रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित की गयी है और डीआरडीओ द्वारा नामित उत्पादन एजेंसियों द्वारा इसे विनिर्माण किया जायेगा. इसके अतिरिक्त, डीएसी द्वारा 14 वर्टिकलर लॉंच्ड शॉर्ट रेंज मिसाइल सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई.

रक्षा अधिग्रहण परिषद: भारत में 11 अक्टूबर 2001 को देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई. रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी. इसका उद्देश्य देश की रक्षा के लिए ख़रीदे जाने वाले हथियारों और उपकरणों की खरीद के लिए मंजूरी प्रदान करना तथा मंत्रालय के समक्ष इस संबंध में अपने विचार एवं रिपोर्ट रखना है.

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