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17 August 2018

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन

तीन बार प्रधानमंत्री रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी बाजपेयी का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया. वह 93 वर्ष के थे. वाजपेयी को मूत्रनली में संक्रमण, गुर्दा (किडनी) नली में संक्रमण, छाती में जकड़न आदि की शिकायत के बाद 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था. मधुमेह से पीड़ित 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री का सिर्फ एक ही गुर्दा काम करता था. बीते 36 घंटों से उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई थी और तमाम प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हो पाया. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. एम्स के मीडिया एवं प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष प्रो. आरती विज की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है, ‘दुख के साथ हम यह सूचना साझा कर रहे हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त को दोपहर बाद 5:05 बजे हो गया.’

वाजपेयी के पार्थिव शरीर को रात में उनके सरकारी आवास छह, कृष्ण मेनन मार्ग पर रखा गया ताकी उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें. 17 अगस्त की सुबह नौ बजे उनके पार्थिव शरीर को दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय ले जाया गया. शाम को राजघाट के पास स्थित राष्ट्रीय स्मृति भवन में उनका अंतिम संस्कार किया गया. स्मृति स्थल जवाहर लाल नेहरू के स्मारक ‘शांति वन’ और लाल बहादुर शास्त्री के ‘विजय घाट’ के बीच स्थित है. पूर्व प्रधानमंत्री आई के गुजराल का अंतिम संस्कार यमुना नदी के किनारे दिसंबर 2012 में स्मृति स्थल पर किया गया था. 

केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. गृह मंत्रालय ने एक परिपत्र में कहा कि देशभर में आज से सात दिनों तक राष्ट्र ध्वज आधा झुका रहेगा और राजकीय सम्मान के साथ वाजपेयी का अंतिम संस्कार किया जाएगा. इसमें कहा गया है, ‘दिवंगत वाजपेयी के सम्मान में यह निर्णय लिया गया है कि पूरे भारत में 16 अगस्त से 22 अगस्त तक सात दिनों का राष्ट्रीय शोक रहेगा.’ गृह मंत्रालय ने कहा, ‘इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय ध्वज पूरे भारत में आधा झुका रहेगा. राष्ट्रीय शोक की अवधि के दौरान कोई आधिकारिक समारोह भी आयोजित नहीं होगा.’ विदेशों में सभी भारतीय मिशनों में भी अंतिम संस्कार के दिन राष्ट्र ध्वज आधा झुका रहेगा.

वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक स्कूल टीचर कृष्ण बिहारी वाजपेयी और कृष्णा देवी के घर हुआ था. वर्तमान में उनके जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई की. उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से एमए किया. कम्युनिज़्म से थोड़े दिन के लगाव के बाद 1947 में वह आरएसएस के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए. वाजपेयी ने 1947 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्णकालिक प्रचारक बने. कुशल राजनीतिज्ञ होने के अलावा वह हिंदी के प्रखर कवि, वक्ता और पत्रकार भी रहे हैं. वह 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित प्रचारक रहे वाजपेयी आजीवन अविवाहित रहे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कुल मिलाकर 47 साल तक संसद के सदस्य रहे. वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए. भाषाओं, विचारधाराओं और संस्कृतियों के भेद से परे एक कद्दावर और यथार्थवादी करिश्माई राजनेता, वाजपेयी एक प्रबुद्ध वक्ता और शांति के उपासक होने के साथ साथ हरदिल अजीज और मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे.

1996 में केंद्र की सत्ता में भाजपा की ताजपोशी वाजपेयी की कमान में ही हुयी थी. हालांकि यह सत्ता मात्र 13 दिन (16 मई 1996 से 01 जून 1996 तक) की थी. वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व के बल पर ही भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन की सरकार 1998 में फिर सत्ता में लौटी और इस बार 13 महीने (19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999) में सरकार अविश्वास प्रस्ताव की अग्नि परीक्षा को पास नहीं कर पाई और गिर गई. अक्टूबर 1999 में बनी भाजपा की अगली सरकार ने उनके नेतृत्व में अपना कार्यकाल (13 अक्टूबर 1999 से 22 मई 2004) पूरा किया.

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