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31 August 2018

केंद्र सरकार ने देश में पहली बार ड्रोन के इस्तेमाल के लिए नीति की घोषणा की

केंद्र सरकार ने 27 अगस्त 2018 को देश में पहली बार ड्रोन के इस्तेमाल के लिए एक नीति की घोषणा की है. सरकार ने ड्रोन के सुरक्षित वाणिज्यिक उपयोग हेतु नियमों की घोषणा की है. ये नियम 01 दिसम्‍बर 2018 से लागू होंगे. इसके लिए उपयोगकर्ताओं को अपने ड्रोन, पायलट और मालिकों का एक बार पंजीकरण कराना जरूरी होगा. प्रत्येक फ्लाइट उपयोगकर्ता को मोबाइल एप के द्वारा अनुमति लेनी होगी और तुंरत ही स्वचालित तरीके से इसका उत्तर यानि परमिट मिलने और नहीं मिलने की जानकारी मिल जाएगी.
डिजिटल अनुमति के बिना उड़ान भरने वाला कोई भी ड्रोन टेकऑफ नहीं कर सकेगा. ड्रोन का उपयोग हवाई सर्वेक्षण, फोटोग्राफी तथा शैक्षणिक उद्देश्य के लिए किया जा सकता है. केंद्र सरकार ने इसके लिए अनुमति लेने के नए नियमों के साथ ही डिजिटल प्‍लेटफार्म भी विकसित किया है. डिजिटल स्‍काई प्‍लेटफॉर्म नामक मोबाइल ऐप आधारित यह तंत्र मानवरहित यातायात प्रबंधन (यूटीएम) के रूप में काम करता है. यह डिजिटल प्‍लेटफॉर्म अनुमति नहीं तो उड़ान नहीं के सिद्धांत पर पारदर्शी तरीके से काम करेगा.

ड्रोन को उनके भार के अनुसार पांच कैटेगरी में विभाजित किया गया है. ड्रोन की सबसे छोटी कैटेगरी में 250 ग्राम से कम वज़न के ड्रोन को रखा गया है. इन श्रेणियों को नैनो, माइक्रो, स्माल, मीडियम और लार्ज में विभाजित किया गया है. नए नियम के अनुसार नैनो ड्रोन को छोड़कर अन्य सभी ड्रोन का पंजीकरण करवाना आवश्यक है. ड्रोन का लाइसेंस लेने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. इसके लिए आपकी उम्र 18 साल होनी चाहिए, दसवीं क्लास तक पढ़ाई की होनी चाहिए और ड्रोन के लिए अंग्रेजी आनी भी जरूरी है. ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया छोटे ड्रोन पर लागू नहीं होगी. जिस ड्रोन का टेक ऑफ भार अधिकतम 2 किलोग्राम है और इसमें कोई पेलोड नहीं है तो इसे 200 फीट के दायरे में बंद जगह में उड़ाने के लिए अनुमति आवश्यक नहीं है. ड्रोन को लेकर कुछ इलाकों को 'नो फ्लाई जोन' भी घोषित किया गया है. इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के इलाके, एयरपोर्ट्स, विजय चौक, सचिवालय, मिलिट्री इलाके शामिल हैं.

नागरिक विमानन महानिदेशालय द्वारा जारी प्रावधानों की सूची ड्रोन के निर्माण में लागू नहीं होगी. अतः जैसे पहले ड्रोन का निर्मात होता आया है और आगे भी जारी रहेगा. कई ऐसे शैक्षणिक संस्थान हैं जिनमें पढ़ाई के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होने लगा है. शैक्षणिक संस्थानों को शिक्षा सम्बन्धी उद्देश्य के निर्मित किये गये ड्रोन के लिए UIN (Unique Identification Number) विशिष्ट पहचान संख्या प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है. नैनो ड्रोन और राष्ट्रीय तकनीकी शोध संगठन (एनटीआरओ) एवं केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के ड्रोनों के अलावा बाकी ड्रोनों का पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें विशेष पहचान संख्या जारी की जाएगी. इन नियमनों को सार्वजनिक करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा की हमारे प्रगतिशील नियमनों से भारत निर्मित ड्रोनों के उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा. सभी असैन्य ड्रोन परिचालन को सिर्फ दिन के समय के लिए सीमित रखा जाएगा और उड़ान सिर्फ उन्हीं जगहों तक सीमित रहेगी जहां दृश्यता अच्छी रहेगी. यह क्षेत्र सामान्यत: 450 मीटर का होता है.

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