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29 August 2018

पूर्व सीनेटर और अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जॉन मैक्केन का निधन

अमेरिकी सीनेटर जॉन मैक्केन का शनिवार को निधन हो गया. मैक्केन स्किन कैंसर से पीड़ित थे. जुलाई 2017 में पता चला कि वो मस्तिष्क में ट्यूमर की समस्या से भी जूझ रहे हैं. इसके बाद उन्हें वॉशिंगटन में इलाज के लिए शिफ़्ट किया गया था. 81 साल के मैक्केन 2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार रहे थे. उन्होंने तीन दशकों तक सीनेटर के रूप में एरिजोना का प्रतिनिधित्व किया. वे दो बार राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़े, लेकिन विफल रहे. पहले वे जॉर्ज डब्ल्यू बुश से प्राथमिक चुनाव प्रचार अभियान में हार गए. उसके बाद 2008 में बराक ओबामा ने उन्हें मात दी.

जॉन मैक्केन का जन्म 29 अगस्त 1936 को हुआ था. जॉन मैक्केन दो बार राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार रहे थे. मैक्केन वर्ष 2008 के चुनाव में ओबामा से राष्ट्रपति की उम्मीदवारी हार गए थे. मैक्केन को युद्ध के हीरो के रूप में जाना जाता है. जॉन मैक्केन ने बतौर सिनेटर तीन दशक सिनेट में बिताए. इस दौरान उन्होंने युद्ध, शांति देश की दशा-दिशा पर बेबाकी से अपनी राय रखी. उन्होंने वर्ष 1983 से लेकर 1987 तक अमेरिकी प्रतिनिधि के तौर भी काम किया. जॉन मैक्केन पिछले कुछ दिनों से सीनेट में मौजूद नहीं रह रहे थे. मैक्केन गर्भपात का विरोध करते थे और रक्षा पर बजट के बड़े हिस्से को खर्च करने की वकालत करते थे. मैक्केन ने 2003 में इराक़ पर अमरीकी हमले का समर्थन किया था.

मैक्केन को वॉर हीरो के रूप में जाना जाता है. मैक्केन की सबसे बड़ी पहचान वियतनाम युद्ध के नायक के रूप में थी. 29 अगस्त, 1936 को पनामा कैनाल जोन में जन्मे मैक्केन के पिता सेना में थे. 1967 में वे अमेरिकी नौसेना अकादेमी में शामिल हुए. उस समय उत्तरी वियतनाम में चल रहे संघर्ष के दौरान वे घायल हुए और बंदी बना लिए गए. जब दुश्मनों ने अपने फायदे के लिए उन्हें छोड़ने का प्रस्ताव दिया तो मैक्केन ने उसे ठुकरा दिया. वे अपने पिता के साथ पांच साल तक युद्ध बंदी रहे. बाद में कैद के दौरान मिली प्रताड़नाओं के चलते उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर किए. वह उनके जीवन का सबसे मुश्किल वक्त था. 1973 में हुए पेरिस शांति समझौते के तहत उन्हें छोड़ दिया गया. लेकिन कैद के दौरान उन्हें जो तकलीफे झेलनी पड़ीं, उनके चलते वे नेवी में बतौर पायलट नहीं लौट सके. हालांकि आगे चल कर वे इससे उबरे और अमेरिकी राजनीति में एक अलग मुकाम हासिल किया. मैक्केन कहा करते थे कि वियतनाम की कैद से निकलने के बाद उन्होंने खुद पर भरोसा करना सीखा.

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