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29 August 2018

भारत के चिड़ियाघर में जन्मे पहले हम्बोल्ट पेंगुइन का निधन

एक हफ्ते पहले ही मुंबई के वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान यानी भायखला चिड़ियाघर में पैदा हुई भारत की पहली हंबोल्ट पेंग्विन का बुधवार को निधन हो गया. 15 अगस्त को फ्लिपर नामक पेंग्विन ने इस मादा पेंग्विन को जन्म दिया था, उस समय दोनों एकदम ठीक थे. पोस्टमॉर्टम के दौरान शुरुआती जांच में पाया गया कि जन्म के समय से ही कुछ समस्या थी, जिसने इस बच्चे की जान ले ली. गुरुवार को बॉम्बे वेटरिनरी कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा इसका पोस्टमॉर्टम किया गया. बताया गया कि फ्लिपर और मोल्ट नामक पेंग्विन ने इस नए मेहमान की खूब देखरेख की थी. फ्लिपर पेंग्विन आठों में सबसे उम्रदराज है. 

बता दें कि वीरमाता ज‍ीजाबाई भोसले उद्यान एवं च‍िड़‍ियाघर में साल 2016 में आठ हंबोल्ट पेंग्विन लाए गए थे. इससे पहले हंबोल्ट पेंग्विन को जू में लाए जाने पर कई सामाज‍िक कार्यकर्ताओं ने इसका व‍िरोध क‍िया था. उनका तर्क था क‍ि हंबोल्ट पेंग्‍व‍िन के ल‍िए जू की जलवायु उपयुक्‍त नहीं है, इसके बाद च‍िड़‍ियाघर ने पेंग्विन को रखने के ल‍िए खास इंतजाम क‍िए थे. पेंग्‍व‍िन के वास स्‍थल को अनुकूल बनाने के ल‍िए वहां एसी का प्रबंध क‍िया गया था. इन पेंग्‍व‍िन को थाईलैंड से मंगाया गया था, जिसमें लगभग 2.50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

हम्बोल्ट पेंगुइन: हम्बोल्ट पेंगुइन को पेरुवियन पेंगुइन भी कहा जाता है. यह दक्षिण अमेरिकी पेंगुइन है जो चिली और पेरू के तटवर्ती इलाकों में पाया जाता है. यह मध्यम आकार के पेंगुइन होते हैं जिनका आकार 56 से 70 सेंटीमीटर (22-28 इंच) होता है तथा इनका वजन 3.6-5.9 किलोग्राम तक होता है. इनके सिर एवं शरीर के ऊपरी भाग का रंग गहरा होता है तथा छाती पर भी काला बैंड होता है. जलवायु परिवर्तन के कारण इनकी गिनती तेजी से घट रही है. एक अनुमान के अनुसार विश्व भर में इस पेंगुइन की जनसंख्या 10,000 तक रह गयी है. अमेरिका ने इसे वर्ष 2010 में लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम के तहत अधिसूचित किया था. पेंगुइन आम तौर पर साढ़े तीन साल की उम्र में अंडे देते है, लेकिन फ्लीपर साढ़े चार साल की मादा हम्बोल्ट है और 21 जुलाई को मोल्ट तीन साल का हो जाएगा. 

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