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09 August 2018

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देनेवाले विधेयक को संसद की मंजूरी

राज्यसभा ने सोमवार को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े संविधान (123वां संशोधन) विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को संवैधानिक दर्जा देने के लिए लोकसभा विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है. इससे पहले ऊपरी सदन ने लोकसभा द्वारा पारित विधेयक में कुछ संशोधन किए थे और इसे संसद के निचले सदन को वापस भेज दिया था. लोकसभा ने राज्यसभा द्वारा किए गए संशोधन विकल्प को मंजूरी दी और विधेयक को पारित कर दिया. यह विधेयक NCBC को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग व राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के बराबर संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है.

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने सदस्यों को भरोसा दिया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के लिए एक महिला सदस्य का प्रावधान नए कानून के तहत नियम बनाए जाने के दौरान किया जाएगा. हालांकि, मंत्री ने अल्पसंख्यक समुदायों से एनसीबीसी का एक सदस्य बनाए जाने की अनिवार्यता की संभावना से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में धर्म आधारित आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है. गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि एनसीबीसी राज्यों और राज्य ओबीसी आयोगों की स्वायत्तता को कमजोर नहीं करेगा. 

गहलोत ने कहा, ‘अनुसूचित जाति (एससी) की सूची केंद्र और राज्यों के लिए समान है लेकिन राज्यों की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की अपनी अलग सूचियां हो सकती हैं. अगर कोई राज्य केंद्रीय ओबीसी सूची में किसी भी जाति को शामिल करना चाहता है तो उसे एनसीबीसी को लिखना होगा, जो उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद उस जाति को शामिल कर सकती है.’ यह विधेयक NCBC को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के संबंध में शिकायतों और कल्याण कार्यक्रमों की जांच करने का भी अधिकार देता है. 

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