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31 August 2018

भारतीय रेलवे ने भारत का पहला स्मार्ट कोच लॉन्च किया

भारतीय रेलवे ने देश का पहला स्मार्ट कोच लांच किया है. स्मार्ट कोच की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ट्रैक फ्रैक्चर होने, पहिए में होने वाली गड़बड़ी, बेयरिंग घिसने समेत कोच की सभी तरह की खराबी की सूचना पहले ही मिल जाएगी. इससे ट्रेन दुर्घटना में कमी आएगी. रेलवे इस तैयार स्मार्ट कोच को कैफियत एक्सप्रेस में लगाने जा रही है. 12 से 14 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च कर इस कोच को रायबरेली की मॉर्डन कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया है. कोच न सिर्फ तापमान कंट्रोल करेगा, बल्कि डस्ट इंफेक्शन लेवल की जानकारी भी देगा. कोच में कई तरह के सेंसर लगाए गए हैं. वीइल, बेयरिंग, स्प्रिंग, ऑसिलेशन और ट्रैक के लिए कोच में अलग-अलग सेंसर लगे हैं. किसी भी पार्ट में खराबी आने पर सेंसर तुरंत कंट्रोल रूम को अर्ल्ट कर देगा.

इस कोच में एसी, डिस्क ब्रेक सिस्टम, फायर डिटेक्शन, अलार्म सिस्टम, वॉटर लेवल इंडिकेटर जैसी सुविधाएं हैं. इसके अलावा इमरजेंसी टॉक बैक सिस्टम भी है. कोच के पैसेंजर टॉइलट के पास लगे इस सिस्टम के बटन को दबाकर सीधा गार्ड से बात कर सकेंगे और मदद ले सकेंगे. पैसेंजर अपने स्मार्टफोन और टैब पर एनफोटेनमेंट सुविधा का लाभ उठा सकेंगे. सफर के दौरान पैसेंजरों को यह जानकारी रहेगी कि अगला स्टेशन कितनी देर में आ रहा है, ट्रेन यदि बीच रास्ते रुकी है तो वह कहां है और क्यों रुकी है, ट्रेन किस स्पीड से चल रही है आदि.

स्मार्ट कोच में लगे सीसीटीवी आर्टिफिशल इंटेलिजेंस कैपेबिलिटी से लैस होंगे. इससे न सिर्फ हाउसकीपिंग, टीटी, ट्रेनों की पेंट्री, संदिग्ध पैसेंजरों पर नजर रखना आसान होगा. साथ ही सीसीटीवी की रिकॉर्ड 30 दिनों तक सुरक्षित रहेगी, जिसकी वजह से अपराध होने पर वह उसे हल करने में मदद करेंगी. स्मार्ट कोच से रेलवे के रखरखाव में पूरी तरह से बदलाव देखा जा सकेगा. इसमें ट्रैक संबंधी दिक्कतें, यात्री सुविधाओं से संबंधित दिक्कतें शामिल हैं. सेंसर द्वारा जानकारी एकत्रित होने से जांच का खर्चा भी कम होगा तथा रेलवे अधिकारी बिना किसी देरी के जानकारी प्राप्त करते रहेंगे. इससे रेल गाड़ी के बारे में रेलवे विभाग पूरी तरीके से अवगत रहेगा और समय रहते तमाम निर्णय लिए जा सकेंगे. सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से भी यह कोच किफायती होंगे.

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