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29 August 2018

मिसाइल वैज्ञानिक जी सतीश रेड्डी बने DRDO के नए अध्यक्ष

प्रख्यात वैज्ञानिक जी. सतीश रेड्डी को रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है. रेड्डी रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार हैं. कार्मिक मंत्रालय के जारी आदेश के अनुसार जी. सतीश रेड्डी को शनिवार को दो साल के लिए डीआरडीओ के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया है. इसी अवधि में वह रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग (डीओडीआरडी) के सचिव भी रहेंगे. एस क्रिस्टोफर के इस साल मई में कार्यकाल पूरा करने के बाद से डीआरडीओ प्रमुख का यह पद पिछले तीन महीने से खाली था. तब रक्षा सचिव संजय मित्रा को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था. क्रिस्टोफर को पिछले साल मई में एक साल का सेवा विस्तार दिया गया था. उनका विस्तारित सेवाकाल भी 28 मई को खत्म हो गया है.

जी. सतीश रेड्डी हैदराबाद स्थित जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेएनटीयू) से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग में स्नातक हैं. उन्होंने जेएनटीयू से ही एमएससी और पीएचडी की है. सतीश रेड्डी हैदराबाद स्थित अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई) में निदेशक के रूप में कई रक्षा परियोजनाओं और कार्यक्रमों की कमान संभाल चुके हैं. रेड्डी को मिसाइल सिस्टम के अनुसंधान और विकास में लंबा अनुभव है. इससे पहले वो रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के वैज्ञानिक सलाहकार थे. जी सतीश रेड्डी को मिसाइल सिस्टम में उनके शोध और विकास के लिए जाना जाता है और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों और उद्योगों के उन्नयन की दिशा में भी उन्होंने निरंतर योगदान दिया है. 

बता दें कि सतीश रेड्डी ने 4 जून 2015 को रक्षा मंत्री के 12वें वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में पद संभाला था. रेड्डी का नौवहन और वैमानिकी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अहम योगदान रहा है. उन्होंने अनुसंधान केंद्र के निदेशक के रूप में कई अहम रक्षा परियोजनाओं में अहम भूमिका निभाई है. सतीश रेड्डी ने सैटेलाइट नेविगेशन रिसीवर और हाईब्रिड नेविगेशन सिस्टम के विकास के साथ नेविगेशन स्कीम, एल्गोरिदम सिस्टम, सेंसर मॉडल, सिमुलेशन की अवधारणा, डिजाइन और विकास जैसे कार्यक्रमों का नेतृत्व किया है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की अग्रणी संस्था है. यह संगठन भारतीय रक्षा मंत्रालय की एक आनुषांगिक ईकाई के रूप में काम करता है. इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1958 में भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में की गयी थी. वर्तमान में संस्थान की अपनी 51 प्रयोगशालाएँ हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण इत्यादि के क्षेत्र में हैं. यह सैन्य उपकरण और साजोसामान के वैज्ञानिक पहलुओं, अनुसंधान, डिजाइन के संबंध में और विकास योजनाओं पर सरकार को परामर्श देता है. संगठन ने अनेक उन्नत रक्षा प्रणालियां विकसित कर चुका हैं. डीआरडीओ ने रक्षा प्रौद्योगिकियों के एक व्यापक वर्णक्रम में विशेषज्ञता अर्जित कर ली है.

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