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02 September 2018

एशियाई खेल 2018: भारत ने किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 18वें एशियाई खेल (एशियन गेम्स) 18 अगस्त से 02 सितंबर 2018 के बीच संपन्न हुआ. 18 अगस्त 2018 को भारतीय समयानुसार शाम 5:30 बजे से उद्घाटन समारोह में भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा तिरंगा थामे भारतीय दल की अगुवाई की. जकार्ता के जीबीके स्टेडियम में होने वाले उद्घाटन समारोह से खेलों का औपचारिक तौर पर उद्घाटन हुआ, जबकि 19 अगस्त 2018 से इवेंट्स की शुरुआत हुई. एशियाई खेल-2018 इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में आयोजित हुई. 02 सितंबर को समापन समारोह भी इसी स्टेडियम में आयोजित हुई. महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल को 18वें एशियाई खेलों के समापन समारोह के लिए भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया. यह पहला मौका है, जब एशियाई खेलों का आयोजन दो शहरों में किया गया. जकार्ता और पालेमबंग इंडोनेशिया के दो शहर हैं, जहां इन खेलों का आयोजन किया गया.

एशियाई खेल 18 अगस्त से 2 सितंबर तक खेले गए. इन खेलों में 45 देशों से करीब 10,000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. यह दूसरा मौका था जब एशियाई खेलों की मेजबानी इंडोनेशिया ने की. इससे पहले 1962 में जकार्ता में एशियाई खेलों का आयोजन हुआ था. एशियाई खेलों में भारत ने इस बार अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 69 पदक अपने नाम किए. इन पदकों में 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक शामिल हैं. बता दें कि इन खेलों के उद्घाटन समारोह के लिए स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया था. नीरज ने इस बार भारत को गोल्ड मेडल दिलाया है. तेइस साल की रानी की कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 20 साल के पदकों को सूखा खत्म करते हुए भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता. हालांकि फाइनल में टीम को जापान के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी. फाइनल में जापान से 1-2 से हारकर 36 साल बाद टीम गोल्ड मेडल जीतने से चूक गई. 

भारत के लिए सबसे ज्यादा मेडल्स एथलेटिक्स में आए हैं, इस लिस्ट में शूटिंग दूसरे नंबर पर है. भारत ने पुरुष 800 मीटर, पुरुष 1500 मीटर, पुरुष गोला फेंक, पुरुष भाला फेंक, पुरुषों के तिहरी कूद, महिलाओं की 4 गुणा 400 मीटर रिले, महिला हेप्टाथलान में स्वर्ण हासिल किए.गोला फेंक में तेजेंदरपाल सिंह तूर ने एशियाई रिकार्ड के साथ भारतीय तिरंगा फहराया. वहीं, निशानेबाजी में भारत को काफी उम्मीदें थीं. भारतीय निशानेबाजों ने निराश नहीं करते हुए भारत की झोली में दो स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य के साथ कुल नौ पदक डाले. कुश्ती में शेर साबित रही भारतीय टीम को सबसे ज्यादा निराशा हाथ लगी. इस खेल में खिलाड़ी केवल दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक ही जीत पाए. इसके अलावा ब्रिज, नौकायन और टेनिस की विभिन्न स्पर्धाओं में भारत ने एक स्वर्ण और दो कांस्य के साथ कुल तीन-तीन पदक हासिल किए. भारतीय मुक्केबाज का भी प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं रहा. भारत एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक ही जीत पाया, 14वें दिन अमित पंघल ने भारत को एकमात्र स्वर्ण दिलाया.

भारत को तीरंदाजी में पदक की उम्मीद तो थी ही लेकिन पदक मिलना आश्चर्यजनक रहा. घुड़सवारी में दो और तीरंदाजी में भी भारत को दो रजत पदक मिले. स्क्वॉश की विभिन्न स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों की चुनौती शानदार रही लेकिन भाग्य ने साथ नहीं दिया. उन्हें एक रजत और चार कांस्य पदक के साथ ही संतोष करना पड़ा. सेलिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए एक रजत और दो कांस्य पदक जीते. बैडमिंटन, हॉकी, कबड्डी और कुराश में भारत की प्रबल दावेदारी थी लेकिन उम्मीद के मुताबिक बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर पाने के चलते भारत को एक रजत, एक कांस्य के साथ कुल दो-दो पदक हासिल किए. वुशू में भारतीय खिलाड़ियों ने दमदार खेल दिखाते हुए कुल चार कांस्य पदक हासिल किए. सेपकटकरा में भी भारत को एक कांस्य पदक मिला. टेबल टेनिस की विभिन्न स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने संतोषजनक प्रदर्शन करते हुए दो कांस्य पदक हासिल किए. इस साल का एशयिन गेम्स स्वप्ना बर्मन , अरपिंदर सिंह के लिए याद किया जाएगा. जिन्होंने तमाम चुनौतियों से पार पाते हुए भारत की झोली में सोने का तमगा गिराया. वहीं जिंनसन जॉनसन ने भी भारत को दो मेडल दिलाए. 

बता दें कि पदक तालिका में भारत 69 मेडल के साथ आठवें स्थान पर काबिज है. वहीं, चीन कुल 289 मेडल के साथ शीर्ष पर मौजूद है जबकि 204 मेडल के साथ जापान दूसरे स्थान पर हैं. इसके अलावा कोरिया रिपब्लिक 176 मेडल के साथ तीसरे स्थान पर है. बता दें कि भारत ने वर्ष 1962 में जकार्ता में 52 पदक जीते थे जिसमें से 12 स्वर्ण, 13 रजत और 27 कांस्य पदक थे. इस संस्करण में भारत तीसरे स्थान पर रहा था. वहीं अगर पिछले तीन संस्करणों की बात की जाए तो भारत तीनों बार 50 से ज्यादा पदक लेकर आया है. 

एशियाई खेलों को एशियाड के नाम से भी जाना जाता है. यह प्रत्येक चार वर्ष बाद आयोजित होने वाली बहु-खेल प्रतियोगिता है जिसमें केवल एशिया के विभिन्न देशों के खिलाडी भाग लेते हैं. इन खेलों का नियामन एशियाई ओलम्पिक परिषद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक परिषद के पर्यवेक्षण में किया जाता है. प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम स्थान के लिए स्वर्ण, दूसरे के लिए रजत और तीसरे के लिए कांस्य पदक दिए जाते हैं. प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन दिल्ली, भारत में वर्ष 1951 में किया गया था, जहां इस माशाल को सबसे पहली बार प्रज्जवलित किया गया था. दूसरी बार भारत ने वर्ष 1982 में पुनः इन खेलों की मेज़बानी की.

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