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31 August 2018

चौथा बिम्सटेक सम्मेलन नेपाल में संपन्न हुआ

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा 31 अगस्त 2018 को बिम्सटेक की अध्यक्षता श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सीरीसेना को सौंपे जाने के साथ ही संगठन का चौथा शिखर सम्मेलन समाप्त हो गया. यह सम्मेलन नेपाल स्थित काठमांडू में 30 अगस्त 2018 को आरंभ हुआ था. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिम्स्टेक के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने नेपाल की राजधानी काठमांडो में आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि भारत
बिम्सटेक के सदस्य देशों के साथ काम करने को प्रतिबद्ध है. इससे क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा. यह क्षेत्र भारत के 'नेबरहुड फ‌र्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियों के मिलाप का बिंदु बन जाएगा. बंगाल की खाड़ी हम सब की सुरक्षा और विकास के लिए खास महत्व रखती है. उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में भारत इंटरनेशनल बौद्ध सम्मेलन की मेजबानी करेगा. उन्होंने इस सम्मेलन में सभी सदस्य देशों को आने का न्योता दिया. उन्होंने कहा कि बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में नालंदा विश्वविद्यालय में एक सेंटर फॉर बे ऑफ बंगाल स्टडीज की स्थापना की जाएगी. 

प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान अन्य नेताओं से मुलाकात की और अपने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श भी किया. प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए हिमालय और बंगाल की खाड़ी के मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि इस तरह की आपदाओं में सभी देशों को एक साथ आना होगा और एक साथ सभी का सहयोग होना आवश्यक है. प्रधान मंत्री मोदी और नेपाल के प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली ने संयुक्त रूप से पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में नेपाल भारत मैत्री धर्मशाला का उद्घाटन किया. पशुपतिनाथ धर्मशाला में 400 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है और यह धर्मशाला भारत-नेपाल मैत्री का प्रतीक है. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने नेपाल की अपनी पहली यात्रा में इस धर्मशाला के निर्माण का घोषणा किया था. भारत ने इसके निर्माण में 25 करोड़ रुपये की मदद की थी.

अंतिम दिन बिम्स्टेक के मौजूदा अध्यक्ष ओली ने काठमांडो घोषणापत्र का मसौदा पेश किया जिसे सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया. इसके मुताबिक बिम्सटेक को एक शांतिप्रिय, समृद्ध और सतत् विकास के स्वरूप वाले क्षेत्र में विकसित करने के लिए सदस्य देशों ने सहमति व्यक्त की. घोषणा पत्र में बिम्सटेक चार्टर को जल्द से जल्द बनाने और ग़रीबी उन्मूलन, ऊर्जा, कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया. बिम्सटेक घोषणापत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजरिए की झलक साफ दिखाई दी. काठमांडू घोषणा पत्र में विभिन्न क्षेत्रों में विकास करने और सहयोग बढ़ाने को लेकर सदस्य देशों ने 2030 तक सतत विकास के एजेंडे के तहत गरीबी उन्मूलन, सेवा और उत्पादकता के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर बल दिया. सूचना तकनीक को बढ़ावा देने, इंटरनेट की पहुंच सभी तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर सभी ने एकराय व्यक्त की गई.

काठमांडू घोषणा पत्र में गोवा ब्रिक्स-बिम्सटेक आउटरिच-2016 को आगे बढ़ाते हुए किसी भी तरह के आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई गई. सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ किसी भी नेटवर्क, वित्तीय सहायता प्रदान करने वाले संस्थान या देश, आतंकवादी गतिविधियों को पनाह देने वालों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ने का संकल्प लिया. बिम्सटेक देशों के बीच सुरक्षा के मुद्दों को लेकर गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव स्तरीय बैठकें करने पर भी सहमति बनी.

गौरतलब है कि बिम्सटेक भारत समेत सात देशों का एक क्षेत्रीय समूह है. इसमें अन्य सदस्य बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल हैं. इस समूह के देशों की कुल आबादी वैश्विक आबादी का 22 प्रतिशत है. इसका कुल घरेलू उत्पादन 2.8 लाख करोड़ डॉलर (करीब 196 लाख करोड़ रुपये) है.

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