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04 September 2018

भारत और नेपाल ने रक्सौल-काठमांडू रेलवे लाइन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये

भारत और नेपाल ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक महत्व के रक्सौल-काठमांडो रेलमार्ग को विकसित करने के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. यह रेलमार्ग बिहार के रक्सौल शहर को नेपाल की राजधानी काठमांडो से जोड़ेगा. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेपाली प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के बाद इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये. हालांकि, इस रेल लाइन के लिए अप्रैल 2018 में ही करार किया गया था. तब नेपाल के पीएम भारत दौरे पर आए थे. इस
रेलवे लाइन से लोगों को आवाजाही में आसानी होगी और बड़ी मात्रा में वस्तुओं के परिवहन के लिए भी यह रेल लाइन उपयोगी सिद्ध होगी. इस रेलवे लाइन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों व विकास को बढ़ावा मिलेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली से द्विपक्षीय मुलाकात की. दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने समेत द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़ी सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा भी की. दोनों नेताओं की यह इस साल की तीसरी बैठक थी. इससे पहले ओली की अप्रैल में भारत यात्रा के दौरान मोदी से मुलाकात हुई थी. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की मई में नेपाल यात्रा के दौरान दोनों नेता मिले थे. बैठक के बाद मोदी ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. इसमें भारत-नेपाल संबंधों से जुड़ी विभिन्न पहलुएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमने आर्थिक, व्यापार तथा सांस्कृतिक संबंधों को आगे और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की. हमारे देशों के बीच संपर्क मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई.

इस सहमति ज्ञापन पर भारत की ओर से राजदूत मंजीव सिंह पुरी और नेपाल की ओर से वहां के भौगोलिक ढांचा एवं निर्माण मंत्रालय के सचिव मधुसुदन अधिकारी ने हस्ताक्षर किए. रक्सौल-काठमांडो रेलमार्ग से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा और थोक में सामान की आवाजाही सरल हो सकेगी. इस रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण कार्य भारत की कंपनी कोंकण रेल कार्पोशन करेगा. यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दो साल पहले ही चीन ने तिब्बत से नेपाल के बीच रेलमार्ग स्थापित करने पर सहमति जतायी थी. भारत और नेपाल के बीच तीन और रेलमार्ग स्थापित करने की योजना है. इनमें न्यू जलपाईगुड़ी-काकरभित्ता, नौटवाना-भैराह्वा और नेपालगंज रोड-नेपालगंज रेलमार्ग शामिल हैं.

भारत-नेपाल सम्बन्ध: भारत और नेपाल के सम्बन्ध अनादि काल से हैं. दोनों पड़ोसी हैं, दोनों की धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषायी एवं ऐतिहासिक स्थिति में बहुत अधिक समानता है. नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री के. पी. ओली नें प्रधानमंत्री पद संभालकर सबसे पहले भारत का दौरा किया. उनके इस दौरे से दोनों देशों के बीच सम्बन्ध और भी मजबूत हुए हैं. भारत-नेपाल संबंधों की शुरुआत वर्ष 1950 की मैत्री और शांति संधि के साथ हुई थी. यही संधि दोनों देशों के बीच व्यापारिक गठजोड़ को भी बढ़ाती रही. भारत-नेपाल के मध्य मधुर एवं सहयोगात्मक संबंध रहे है. नेपाल के राजनीतिक संक्रमण काल के दौरान भारत ने वृहद स्तर पर इसकी सहायता की. मोदी सरकार ने पिछले तीन साल में नेपाल सहित अन्य सभी सार्क देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किये हैं.

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