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06 May 2021

पद्मश्री से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ. मानस बिहारी का निधन

देश के पहले सुपरसोनिक लड़ाकू विमान 'तेजस' को बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले पद्मश्री डॉ. मानस बिहारी वर्मा का 04 मई 2021 को निधन हो गया. वे 78 साल के थे. पद्मश्री सम्मान से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ. मानस बिहारी वर्मा का बिहार के दरभंगा शहर के लहेरियासराय मुहल्ला स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. 
डीआरडीओ, बेंगलुरु में रक्षा वैज्ञानिक रहे डॉ. मानस बिहारी वर्मा पूर्व राष्ट्रपति कलाम के सहयोगी रहे थे. लड़ाकू विमान 'तेजस' को बनाने में डॉ. वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्होंने रक्षा अनुसंधान विकास संगठन में 35 वर्षों तक वैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवा दी. डॉ वर्मा कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और घर पर ही उनका ईलाज चल रहा था.

डॉ वर्मा के निधन से मिथिला समेत पूरे बिहार में शोक की लहर है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. मानस बिहारी वर्मा के निधन पर शोक और गहरी संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि प्रसिद्ध रक्षा वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. मानस बिहारी वर्मा जी का निधन दुखद है. वे महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी के सानिध्य में काम करने वाले लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट "तेजस" के निर्माण में प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी थे.

डा. वर्मा का जन्म 29 जुलाई 1943 को दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के छोटे से गांव बाऊर में  हुआ था. वे चार बहन और तीन भाई थे. उनकी बचपन की प्रवृत्तियों को देखकर माता-पिता उन्हें ऋषि कहने लगे थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई. हाईस्कूल तक की पढ़ाई उन्होंने जिला स्कूल चाईबासा, जिला स्कूल गया और जिला स्कूल मधेपुर से की. इसके बाद पटना साइंस कॉलेज, बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज और सागर विश्वविद्यालय से उच्च और तकनीकी शिक्षा हासिल की. उन्‍हें डीआरडीओ के 'साइंटिस्ट ऑफ द इयर' और 'टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवॉर्ड' से क्रमशः पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने सम्‍मानित किया था. उन्‍हें साल 2018 में पद्मश्री सम्‍मान दिया गया था. डा.वर्मा, रिटायरमेंट के बाद साल 2005 से अपने गांव बाऊर में रह रहे थे. वे अलग-अलग एनजीओ के जरिए बच्चों और शिक्षकों के बीच विज्ञान का प्रसार करने में जुटे रहते थे.

डॉ. मानस बिहारी वर्मा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के अभिन्न मित्र थे. साल 1986 में तेजस फाइटर जेट विमान बनाने के लिए जो टीम बनी थी उस समय लगभग 700 इंजीनियर इस टीम में शामिल किए गए थे. डॉक्टर वर्मा ने इस टीम में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में अपना योगदान दिया था. मानस बिहारी वर्मा ने 35 वर्षों तक DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया. डॉ. मानस बिहारी को लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम करने का मौका मिला.

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