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29 October 2021

देखिए किस प्रकार मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप ने अकबर को नानी याद दिलाई

आज हम बात कर रहे हैं वीरों की भूमि राजस्थान में जन्मे सोलहवीं शताब्दी के महान हिंदू राजा महाराणा प्रताप की, जिन्होंने मुगल शासक अकबर को कई बार रणभूमि में टक्कर द. अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को कुंभलगढ़ में हुआ था. उन्होंने अपनी मां से ही युद्ध कौशल सीखा था. राजा महाराणा प्रताप के भाले का वजन कुल 81 किलो था, साथ ही उनके छाती का कवच 72 किलो का था. भाला, कवच, ढाल और दो तलवारों के साथ उनके अस्त्र और शस्त्रों का वजन 208 किलो था.


इतिहासकारों की माने तो अकबर ने महाराणा प्रताप से समझौते के लिए 6 दूत भेजे थे, लेकिन महाराणा प्रताप ने हर बार उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योंकि राजपूत योद्धा कभी भी किसी के सामने घुटने नहीं टेकते. देश के इतिहास में दर्ज हल्दीघाटी का युद्ध आज भी पढ़ा जाता है. राजा महाराणा प्रताप और मुगल बादशाह अकबर के बीच लड़ा गया ये युद्ध बहुत ही विनाशकारी था. हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था. हल्दीघाटी का युद्ध न तो अकबर जीत सका था और न ही महाराणा हारे थे. मुगलों के पास बहुत बड़ी सेना थी, तो राणा प्रताप के पास वीरों की कोई कमी नहीं थी. 

हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास महज 20 हजार सैनिक थे और अकबर के पास 85 हजार सैनिक थे. इसके बावजूद महाराणा प्रताप ने साहस के साथ जंग लड़ी और आजादी के लिए संघर्ष करते रहे. महाराणा प्रताप का सबसे चहेता घोड़ा चेतक था, उनके तरह ही उनका घोड़ा चेतक भी बहुत बहादुर था. हल्दीघाटी की लड़ाई में गंभीर चोटें लगने के कारण चेतक की मौत हो गई थी. हल्दीघाटी युद्ध के दौरान जब मुगल सेना महाराणा के पीछे पड़ी थी, तब चेतक ने राणा को अपनी पीठ पर बिठाकर, कई फीट लंबे नाले को छलांग लगा कर पार किया था. आज भी हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है.

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