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23 November 2021

संसद में कैसे होगा कृषि कानून वापस? क्या है वैधानिक प्रक्रिया और तरीका?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश पर्व के दिन तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान कर दिया है. हालांकि, किसानों ने कहा है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि संसद से कानून वापस नहीं हो जाता. ऐसे में सवाल यह उठता है कि अब ये कानून संसद से कब वापस होंगे? और कानून वापसी की क्या प्रक्रिया है?
किसी भी कानून को वापस करने के दो तरीके हैं. पहला अध्यादेश और दूसरा संसद से बिल पारित कराना. अगर किसी कानून को वापस लेने के लिए अध्यादेश लाया जाता है तो उसे छह महीने के भीतर फिर से संसद से पारित कराना होगा. यदि किसी कारणवश अध्यादेश संसद द्वारा छह महीने के अंदर पारित नहीं होता है तो निरस्त कानून फिर से प्रभावी हो सकता है.

अगर संसद से पास किसी कानून को संसद के जरिए वापस लिया जाना है तो सबसे पहले संबंधित मंत्रालय द्वारा संसद में कानून वापसी से जुड़ा एक प्रस्ताव तैयार किया जाता है और उसे कानून मंत्रालय के पास भेजा जाता है. इसके बाद कानून मंत्रालय उस प्रस्ताव का अध्ययन करता है और उसके कानूनी वैधानिकता की जांच करता है. कानून मंत्रालय एक तरह से उस प्रस्ताव की स्क्रूटनी करता है और जरूरी होने पर उसमें कुछ जोड़-घटाव की सिफारिश भी कर सकता है. कानून मंत्रालय से क्लियरेंस मिलने के बाद संबंधित मंत्रालय कानून वापसी के ड्राफ्ट के आधार पर बिल तैयार करेगा और उसे संसद में पेश करेगा. इसके बाद संसद के दोनों सदनों में प्रस्तावित बिल पर चर्चा, बहस और वोटिंग कराने का प्रावधान है. अगर कानून वापसी के पक्ष में ज्यादा वोट पड़े तो सदन कानून वापसी का बिल पारित करेगा. एक ही बिल के जरिए तीनों कृषि कानून वापसी किया जा सकता है.

दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से कानून वापसी का बिल पारित होने के बाद उसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद उसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा. इस तरह कानून वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी.

अब तक 6 बार कानून वापसी का बिल ला चुकी मोदी सरकार: केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में कृषि कानून वापसी का बिल पेश करेगी. चूंकि विपक्षी दल पहले से ही इस कानून का विरोध कर रहे हैं तो इसे पारित होने में कोई परेशानी नहीं होगी. 2014 में सत्ता में आने के बाद से नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद से अब तक कुल छह निरसन और संशोधन अधिनियम पारित कराए हैं, ताकि 1,428 से अधिक अप्रचलित क़ानूनों को निरस्त किया जा सके.

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