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13 April 2021

हिन्दू नववर्ष का शुभारम्भ

हिन्दू धर्म में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नवसंवत की शुरुआत होती है. इसे भारतीय नववर्ष भी कहा जाता है. इसका आरम्भ विक्रमादित्य ने किया था, इसलिए इसे विक्रम संवत भी कहा जाता है. विक्रम संवत् भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित हिन्दू पंचांग है. नेपाल के सरकारी संवत् के रुप मे विक्रम संवत् ही चला आ रहा है. इसमें चान्द्र मास एवं सौर नाक्षत्र वर्ष का उपयोग किया जाता है. प्रायः माना जाता है कि विक्रमी संवत् का आरम्भ 57 ई.पू. में हुआ था. (विक्रमी संवत् = ईस्वी सन् + 57).
इस संवत् का आरम्भ गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से और उत्तरी भारत में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है. बारह महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत् से ही शुरू हुआ. महीने का हिसाब सूर्य व चन्द्रमा की गति पर रखा जाता है. यह बारह राशियाँ बारह सौर मास हैं. जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रान्ति होती है. पूर्णिमा के दिन, चन्द्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है. चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घटी 48 पल छोटा है, इसीलिए प्रत्येक 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ दिया जाता है.

शक संवत: शक संवत को भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर कहा जाता है इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ ही  22 मार्च 1957, को भारत सरकार द्वारा अपनाया गया. इसकी शुरुआत 78 ईस्वी में हुआ था. यह भारत का राजपत्र, आकाशवाणी द्वारा प्रसारित समाचार और भारत सरकार द्वारा जारी संचार विज्ञप्तियों मे ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ प्रयोग किया जाता है. चैत्र भारतीय राष्ट्रीय पंचांग का प्रथम माह होता है. राष्ट्रीय कैलेंडर की तिथियाँ ग्रेगोरियन कैलेंडर की तिथियों से स्थायी रूप से मिलती-जुलती हैं. चन्द्रमा की कला (घटने व बढ़ने) के अनुसार माह में दिनों की संख्या निर्धारित होती है.

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