27 January 2022

गणतंत्र दिवस



गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है. इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था. एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था. 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था.

25 January 2022

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

भारत में प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है. राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने का उद्देश्य युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना है. मतदान करना प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का अधिकार है क्योंकि प्रत्येक वोट नई सरकार और लोकतंत्र के भाग्य का फैसला करता है. इस दिन, विभिन्न भाषण प्रतियोगिताओं, अभियान, नए मतदाताओं को वोटर आईडी वितरण, मतदाताओं की फोटोग्राफी, आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को हुई थी. राष्ट्रीय मतदाता दिवस पहली बार 25 जनवरी, 2011 को मनाया गया था. यह चुनाव आयोग का 61वां स्थापना दिवस था.

24 January 2022

राष्ट्रीय बालिका दिवस

राष्ट्रीय बालिका दिवस  प्रत्येक साल 24 जनवरी को देश भर में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य देश की लड़कियों को हर लिहाज से अधिक से अधिक सहायता और सुविधाएं प्रदान करना है. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय बालिका दिवस का एक अन्य उद्देश्य लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर लोगों को जागरूक करना है. 
ऐसा माना जाता है कि हमारे समाज की लड़कियां आज से नहीं बल्कि हमेशा से जीवन के हर मामले में पक्षपात का सामना करती आ रही हैं. राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के पीछे

23 January 2022

सुभाष चन्द्र बोस जयंती

आज स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है. नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को ओड़िशा के कटक शहर में हिन्दू कायस्थ परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था. जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे. अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था. सुभाष चन्द्र बोस 
कटक के प्रोटेस्टेण्ट स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर 1909 में  रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में दाखिला लिया. कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का सुभाष के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ा. मात्र

14 January 2022

महर्षि वेदव्यास की कहानी

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता थे. कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महर्षि पराशर और सत्यवती के पुत्र थे. महाभारत ग्रंथ का लेखन भगवान् गणेश ने महर्षि वेदव्यास से सुन सुनकर किया था. वेदव्यास महाभारत के रचयिता ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं के साक्षी भी रहे हैं, जो क्रमानुसार घटित हुई हैं. अपने आश्रम से हस्तिनापुर की समस्त गतिविधियों की सूचना उन तक तो पहुंचती थी. वे उन घटनाओं पर अपना परामर्श भी देते थे. जब-जब अंतर्द्वंद्व और संकट की स्थिति आती थी, माता सत्यवती उनसे विचार-विमर्श के लिए कभी आश्रम पहुंचती, तो कभी हस्तिनापुर के राजभवन में आमंत्रित करती थी. 

जरासंध की कहानी

जरासंध महाभारत कालीन मगध राज्य के नरेश थे. सम्राट जरासंध ने बहुत से राजाओं को अपने कारागार में बंदी बनाकर रखा था पर उसने किसी को भी मारा नहीं था. इसका कारण यह था कि वह चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा हेतु ही वह इन राजाओं को बंदी बनाकर रख रहा था ताकि जिस दिन 101 राजा हों और वे महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी बलि दे सके. 
वह मथुरा के नरेश कंस का ससुर एवं परम मित्र था उसकी दोनो पुत्रियो अस्ति और प्राप्ति का विवाह कंस से हुआ था. श्रीकृष्ण से कंस के वध का प्रतिशोध लेने के लिए उन्होंने 17 बार मथुरा पर चढ़ाई की लेकिन जिसके कारण भगवान श्रीकृष्ण को मथुरा छोड़ कर जाना पड़ा फिर वो द्वारिका जा बसे, तभी वे नाम रणछोड़ कहलाये.