25 February 2022

देखिए क्या है नाटो जिसके कारन रूस और यूक्रेन में जंग छिड़ चूका है

रूस और यूक्रेन के बीच जंग के बाद हालात तीसरे विश्वयुद्ध की ओर जा रहा है लेकिन इसके साथ ही एक शब्द फ़िज़ा में गूंज रहा है, नाटो. यूक्रेन को लेकर रूस की तल्ख़ी भी इसी नाटो की वजह से है. रूस हर हाल में यूक्रेन को नाटो दूर रखना चाहता है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो जाए. बस यही खींचतान हालात को जंग के मैदान तक ले आई. सवाल यही उठता है कि आखिर ये नाटो (NATO) है क्या आखिर अमेरिका यूक्रेन को नाटो में क्यों शामिल करना चाहता है और रूस इसका क्यों विरोध करता है?

10 February 2022

गुलाम वंश

कुतुबुद्दीन ऐबक :- (1206-1210)
1206 में महमूद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली के सिंहासन पर बैठा. इसी के साथ भारत में पहली बार गुलाम वंश की स्थापना हुई. कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्य अभिषेक 12 जून 1206 को हुआ. इसने अपनी राजधानी लाहौर को बनाया. कुतुबुद्दीन ऐबक कुत्त्बी तुर्क था. कुतुबुद्दीन ऐबक महमूद गौरी का गुलाम व दामाद था. कुतुबुद्दीन ऐबक ने यलदोज (गजनी) को दामाद, कुबाचा (मुलतान + सिंध) को बहनोई और इल्तुतमिश को अपना दामाद बनाया ताकि गौरी की मृत्यु के बाद सिंहासन का कोई और दावेदार ना बन सके. इसने अपने गुरु कुतुबद्दीन बख्तियार काकी की याद में कुतुब मीनार की नींव रखी परंतु वह इसका निर्माण कार्य पूरा नही करवा सका. इल्तुतमिश ने कुतुब मीनार का निर्माण कार्य पूरा करवाया. दिल्ली में स्थित कवेट-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर का ढाई दिन का झोंपडा का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने ही करवाया था. कवेट-उल-इस्लाम मस्जिद भारत में निर्मित पहली मस्जिद थी. 1210 में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर इसकी मृत्यु हुई तथा इसे लाहौर में दफनाया गया था.

गुलाम वंश

गुलाम वंश मध्यकालीन भारत का एक राजवंश था. इस वंश का पहला शासक कुतुबुद्दीन ऐबक था जो मोहम्मद ग़ौरी का गुलाम था. ग़ुलामों को सैनिक सेवा के लिए ख़रीदा जाता था और मो. गौरी ने भी इसे खरीद कर लाया था. ये पहले ग़ौरी के सैन्य अभियानों के सहायक बने और फिर दिल्ली के सुल्तान. इन्होने गौरी की मृत्यु के बाद दिल्ली की सत्ता पर राज किया. कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्य अभिषेक 12जून 1206 को हुआ. इस वंश ने दिल्ली की सत्ता पर 1206 से 1290 ईस्वी तक राज किया तथा भारत में इस्लामी शासन की नींव डाली. इससे पूर्व किसी भी मुस्लिम शासक ने भारत में लंबे समय तक प्रभुत्व कायम नहीं किया था. इसी समय चंगेज खाँ के नेतृत्व में भारत के उत्तर पश्चिमीक्षेत्र पर मंगोलों का आक्रमण भी हुआ था. इस वंश के निम्नलिखित शासक हुए:

मो. गौरी का गुलाम और गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक

क़ुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली सल्तनत के संस्थापक और ग़ुलाम वंश के पहले सुल्तान थे. 1206 में महमूद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली के सिंहासन पर बैठा. इसी के साथ भारत में पहली बार गुलाम वंश की स्थापना हुई. कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्य अभिषेक 12जून 1206 को हुआ. इसने अपनी राजधानी लाहौर को बनाया. ये ग़ौरी साम्राज्य के सुल्तान मुहम्मद ग़ौरी का गुलाम था. ग़ुलामों को सैनिक सेवा के लिए ख़रीदा जाता था. ये पहले ग़ौरी के सैन्य अभियानों के सहायक बने और फिर दिल्ली के सुल्तान. क़ुतुबुद्दीन तुर्किस्तान के निवासी थे और इनके माता पिता तुर्क थे. इस क्षेत्र में उस समय दास व्यापार का प्रचलन था और इसे लाभप्रद माना जाता था. दासों को उचित शिक्षा और प्रशिक्षण देकर उन्हें राजा के हाथ बेचना एक लाभदायी धन्धा था. बालक कुतुबुद्दीन इसी व्यवस्था का शिकार बना और उसे एक व्यापारी के हाथों बेच डाला गया. व्यापारी ने उसे फ़िर निशापुर के का़ज़ी फ़ख़रूद्दीन अब्दुल अज़ीज़ कूफी को बेच दिया. अब्दुल अजीज़ ने बालक क़ुतुब को अपने पुत्र के साथ सैन्य और धार्मिक प्रशिक्षण दिया. पर अब्दुल अज़ीज़ की मृत्यु के बाद उसके पुत्रों ने उसे फ़िर से बेच दिया और अंततः उसे मुहम्मद ग़ोरी ने ख़रीद लिया.