19 May 2022

मुग़ल बादशाह फर्रुखशियर

फ़र्रुख़सियर एक मुग़ल बादशाह था जिसने 1713 से 1719 तक हिन्दुस्तान पर हुकूमत की. 
उसका पूरा नाम अब्बुल मुज़फ़्फ़रुद्दीन मुहम्मद शाह फ़र्रुख़ सियर था.  1715 ई. में अंग्रेजो का एक शिष्टमंडल जाॅन सुरमन की नेतृत्व में भारत आया. यह शिष्टमंडल उत्तरवर्ती मुग़ल शासक फ़र्रूख़ सियर की दरबार में 1717 ई. में पहुँचा. उस समय फ़र्रूख़ सियर जानलेवा घाव से पीड़ित था. इस शिष्टमंडल में हैमिल्टन नामक डाॅक्टर थे जिन्होनें फर्रखशियर का इलाज किया था. इससे फ़र्रूख़ सियर खुश हुआ तथा अंग्रेजों को भारत में कहीं भी व्यापार करने की अनुमति तथा अंग्रेज़ों द्वारा बनाऐ गए सिक्के को भारत में सभी जगह मान्यता प्रदान कर दिया गया. फ़र्रूख़ सियर द्वारा जारी किये गए इस घोषणा को ईस्ट इंडिया कंपनी का मैग्ना कार्टा कहा जाता है. मैग्ना कार्टा सर्वप्रथम 1215 ई. में ब्रिटेन में जाॅन-II के द्वारा जारी हुआ था. 

फर्रुखशियर के पिता अजीम ओशान की 1712 में जहांदर शाह द्वारा हत्या कर दी गई थी और जहांदर शाह ने उनके पिता की मृत्यु कर मुगल सम्राट बने थे अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए फर्रूखसियर ने  10 जनवरी 1713 में समूगढ के युद्ध में जहांदरशाह की सेनाओं को पराजित किया और उसकी हत्या कर दी और  दिल्ली पहुंचकर  लाल किले पर अपने आप को मुगल साम्राट घोषित किया. इस प्रकार उन्होंने अपने पिता की मौत का बदला ले लिया. अपने पूरे 6 वर्ष के कार्यकाल में फर्रूखसियर सैयद बंधुओं के चंगुल से आजाद ना हो सके. उन्होंने सैयद हुसैन अली खान को अपना वजीर घोषित किया जबकि वह उसको वजीर घोषित नहीं करना चाहते थे परंतु शायद बंधुओं के दबाव पर उन्होंने उसको अपना वजीर घोषित किया. उन्होंने अजीत सिंह के रोकने का पूर्ण प्रयत्न किया परंतु अजीत सिंह को रोकने में सफल नहीं रहे क्योंकि लगातार दक्षिण भारत में व्यस्त रहने के कारण उत्तर भारत में कई राजपूत एवं जाट शक्तियां वापस बनाई थी 1615 मे अजीत सिंह की बेटी से विवाह कर अजीत सिंह को रोक लिया परंतु बंदा सिंह बहादुर ग्रुप से उनको बड़ी मेहनत करनी पड़ रही थी. बंदा सिंह बहादुर ने 1708 में मुगलों के नाक में दम कर रखा था परंतु 1716 में उन्होंने बंदा सिंह बहादुर को पकड़ लिया और 40 सिखों की हत्या कर दी. बाद में उन्होंने  बंदा सिंह बहादुर को पराजित कर उसकी दोनों आंखें फोड़ दी और उनकी खाल निकाल ली और बहुत ही बुरी तरीके से उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए. इसे पूरे सिख लोगों में मुगलों के विरुद्ध एक आक्रोश की भावना पैदा हो गयी. 

मराठों के विरुद्ध भी फर्रूखसियर की नीति कुछ अलग थी. सैयद हुसैन अली खान जो कि वजीर था वह फर्रूखसियर को अपना गुलाम बनाना चाहता था परंतु फर्रूखसियर ने उसके आदेशों को ना मानना शुरू कर दिया, जिसके तहत उसने ढक्कन में मराठों से सहायता मांगी. उसने मराठों को दक्कन में सरदेशमुखी और चौथ वसूलने के लिए इजाजत दे दी जिससे फर्रूखसियर काफी नाराज हो गया. फर्रुखशेयर ने अता हुसैन अली को पराजित करने का फैसला किया परंतु ऐसा करने में सफल नहीं हो सका क्योंकि सैयद बंधु बहुत ही ताकतवर मंत्री थे और उनका प्रभाव संपूर्ण मुगल दरबार में था. हुसैन अली बहुत ही ताकतवर मंत्री था अंततः उसने मराठों से संबंध स्थापित किए और 1719 में फर्रुखसियार का वध करवा दिया गया. किसी ना किसी कारणों से उस वक्त उनकी उम्र मात्र 33 वर्ष की थी और उसके बाद उसने दो मुगल सम्राटों के छोटे-छोटे कार्यकाल के लिए गद्दी पर बैठाया और इससे अपनी ताकत को और बढ़ाया. कोई भी मुगल सम्राट सैयद बंधु के चंगुल से बच नहीं पा रहा था अंततः मोहम्मद शाह ने 1719 में मुगल सम्राट बने. उन्होंने चीनकिलिच खां यानी आशाफ जा प्रथम जो कि बाद में चलकर हैदराबाद के निजाम बने उनकी सहायता लेकर सैयद बंधुओं को खत्म किया 1723 में और एक स्वतंत्र मुगल सम्राट के रूप में उभरे. सम्राट बनने के बाद मुगल साम्राज्य कुछ खास विस्तार नहीं किया बल्कि मुगल साम्राज धीरे-धीरे खत्म होना शुरू हो गया.

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